बाराबंकी। अयोध्या में कैदियों के फरार होने की घटना के बाद उत्तर प्रदेश में कारागार सुरक्षा व्यवस्था को पूरी तरह तकनीक आधारित बनाने की कवायद तेज हो गई है। इसी क्रम में जिला कारागार बाराबंकी को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई की पहरेदारी में लाया जा रहा है। जेल की मुख्य दीवार से लेकर भीतर के परिसर तक हर गतिविधि पर एआई आधारित निगरानी होगी, जिससे किसी भी संदिग्ध हरकत पर तत्काल अलर्ट मिल सकेगा।
मुख्य दीवार पर एआई कैमरे, चढ़ते ही अलर्ट
नई सुरक्षा व्यवस्था के तहत कारागार की मुख्य दीवार पर 22 फीट की ऊंचाई पर आठ अत्याधुनिक एआई कैमरे लगाए जाएंगे, जिनमें अलर्ट सिस्टम इनबिल्ट होगा। जैसे ही कोई व्यक्ति 18 फीट की ऊंचाई तक पहुंचेगा, सिस्टम तुरंत चेतावनी जारी कर देगा। यदि कोई कैदी दीवार पार करने की कोशिश करता है तो तेज अलार्म बजने लगेगा। खास बात यह है कि यह तकनीक सिर्फ इंसानी गतिविधि को पहचान सकेगी, पक्षी या जानवर की हलचल पर कोई अलर्ट नहीं देगा।
बॉडी वार्न कैमरों से हर गतिविधि रिकॉर्ड
अंग्रेजी शासनकाल में निर्मित जिला कारागार को अब आधुनिक सुरक्षा घेरे में लाया जा रहा है। वर्तमान में जेल में 50 सीसीटीवी कैमरों के जरिए निगरानी की जा रही है, लेकिन अब इसे और सख्त किया जा रहा है। जेल कर्मियों को बॉडी वार्न कैमरे दिए जाएंगे, जिससे ड्यूटी के दौरान उनकी गतिविधियां भी रिकॉर्ड होंगी और जेल के भीतर होने वाली हर गतिविधि का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार रहेगा।
ड्रोन से भी होगी निगरानी, कर्मियों को प्रशिक्षण
जेल परिसर की निगरानी के लिए ड्रोन तकनीक का भी इस्तेमाल किया जाएगा। इसके संचालन के लिए पांच बंदीरक्षकों को विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है। ड्रोन के जरिए ऊंची दीवारों, छतों और संवेदनशील हिस्सों पर लगातार नजर रखी जाएगी, जिससे किसी भी सुरक्षा चूक की आशंका कम हो सके।
24 बैरक में 1120 कैदी, सुरक्षा में 120 बंदीरक्षक
वर्तमान में जिला कारागार की 24 बैरकों में कुल 1120 कैदी निरुद्ध हैं, जिनमें 45 महिला बंदी भी शामिल हैं। सुरक्षा व्यवस्था की कमान एक जेल अधीक्षक, एक जेलर, पांच डिप्टी जेलर और करीब 120 बंदीरक्षकों के हाथ में है। एआई आधारित निगरानी के लागू होने के बाद सुरक्षा व्यवस्था और अधिक सख्त हो जाएगी।
जेल अधीक्षक का बयान
जेल अधीक्षक कुंदन कुमार ने बताया कि कारागार की मुख्य दीवार पर एआई तकनीक से लैस आठ कैमरे विद अलर्ट सिस्टम लगाए जा रहे हैं। अब कोई भी कैदी दीवार पर चढ़ने की कोशिश करेगा तो अलार्म अपने आप बज उठेगा। इसके साथ ही बंदीरक्षकों की ड्यूटी अवधि और उनकी गतिविधियों की भी रिकॉर्डिंग की जाएगी, जिससे सुरक्षा में किसी तरह की चूक की गुंजाइश नहीं रहेगी।