‘खामोश करवाया गया हूं, हारा नहीं’: राज्यसभा में बोलने से रोके जाने पर राघव चड्ढा का बड़ा बयान, सियासत तेज
नई दिल्ली। आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। पार्टी द्वारा उन्हें राज्यसभा में उपनेता पद से हटाए जाने और सदन में बोलने के लिए समय न दिए जाने के फैसले के बाद चड्ढा ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि उनकी आवाज दबाई जा सकती है, लेकिन उन्हें हराया नहीं जा सकता। राघव चड्ढा का यह बयान ऐसे वक्त आया है जब पार्टी के अंदरूनी फैसलों और नेतृत्व को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
‘मेरी आवाज क्यों दबाई जा रही है?’
राघव चड्ढा ने कहा कि जब भी उन्हें राज्यसभा में बोलने का मौका मिला, उन्होंने हमेशा आम आदमी से जुड़े मुद्दों को उठाया। उन्होंने सवाल किया कि आखिर उनके बोलने से किसे परेशानी है और क्यों उन्हें रोकने की कोशिश की जा रही है।
उन्होंने कहा, “मैं जो मुद्दे उठाता हूं, क्या वे गलत हैं? आम आदमी पार्टी को उनसे क्या नुकसान हुआ?” उन्होंने जनता का आभार जताते हुए कहा कि वह हमेशा लोगों के लिए काम करते रहेंगे। अपने संदेश में उन्होंने भावुक अंदाज में कहा, “मेरी खामोशी को मेरी हार मत समझना, मैं वो दरिया हूं जो वक्त आने पर सैलाब बनता है।”
पार्टी का बड़ा फैसला, अशोक मित्तल बने उपनेता
दरअसल, आम आदमी पार्टी ने राघव चड्ढा को राज्यसभा में उपनेता पद से हटाकर उनकी जगह अशोक मित्तल को जिम्मेदारी सौंपी है। इसके साथ ही पार्टी ने राज्यसभा सचिवालय को यह भी सूचित किया कि चड्ढा को सदन में बोलने के लिए समय आवंटित न किया जाए। इस घटनाक्रम के बाद राघव चड्ढा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक वीडियो साझा किया, जिसमें उनके राज्यसभा में दिए गए भाषणों के अंश शामिल थे। इस वीडियो को उन्होंने “बुरी नजर” कैप्शन के साथ पोस्ट किया।
बीजेपी का हमला, ‘पार्टी में अंदरूनी संकट’
इस पूरे मामले पर भारतीय जनता पार्टी ने आम आदमी पार्टी पर निशाना साधा है। दिल्ली भाजपा अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने इस फैसले को पार्टी के अंदरूनी संकट का संकेत बताया। उन्होंने कहा कि किसी भी पार्टी को अपने संसदीय पदों पर बदलाव करने का अधिकार होता है, लेकिन जिस तरह राघव चड्ढा को हटाने के साथ-साथ उन्हें बोलने का मौका न देने की बात कही गई, वह असामान्य और चिंताजनक है।
सचदेवा ने आम आदमी पार्टी के नेतृत्व पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह कदम संकेत देता है कि पार्टी के भीतर असंतोष बढ़ रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि पहले स्वाति मालीवाल और अब राघव चड्ढा जैसे नेता नेतृत्व से दूरी बनाते नजर आ रहे हैं, जो पार्टी के लिए गंभीर संकेत है।
सियासी असर और आगे की राह
राघव चड्ढा को लेकर उठे इस विवाद ने आम आदमी पार्टी के अंदरूनी हालात को लेकर नई बहस छेड़ दी है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि पार्टी इस मुद्दे पर क्या रुख अपनाती है और चड्ढा की भूमिका आगे किस दिशा में जाती है।