IDFC बैंक घोटाला: 25 रुपये लिखे चेक से ढाई करोड़ की निकासी, IAS के फर्जी साइन से 46.50 करोड़ ट्रांसफर का खुलासा
पंचकूला से सामने आए 590 करोड़ रुपये के आईडीएफसी फर्स्ट बैंक घोटाले ने बैंकिंग और प्रशासनिक तंत्र दोनों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) की जांच में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं, जिनमें हरियाणा के विकास एवं पंचायत विभाग के तत्कालीन निदेशक आईएएस डीके बेहरा के फर्जी हस्ताक्षर कर करीब 46.50 करोड़ रुपये का भुगतान किए जाने का खुलासा हुआ है।
जांच में सामने आया है कि IDFC First Bank से जुड़े इस मामले में जाली हस्ताक्षरों के आधार पर कई चेक और डेबिट नोट प्रोसेस किए गए। उस समय निदेशक रहे आईएएस डीके बेहरा वर्तमान में हरियाणा के राज्यपाल प्रो. असीम कुमार घोष के सचिव हैं। खास बात यह है कि बेहरा 28 अक्टूबर 2025 को अपना पद छोड़ चुके थे, इसके बावजूद उनके नाम से लेनदेन जारी रहे।
चेक में अंकों में ढाई करोड़, शब्दों में सिर्फ 25 रुपये
मामले का सबसे बड़ा खुलासा चेक नंबर 000011 को लेकर हुआ। इस चेक में राशि अंकों में 2,50,00,000/- यानी दो करोड़ 50 लाख रुपये दर्ज थी, जबकि शब्दों में केवल ‘रुपीज ट्वेंटी-फाइव’ लिखा गया था। हैरानी की बात यह है कि बैंक ने इस स्पष्ट विसंगति के बावजूद भुगतान कर दिया।
जांच में यह भी पाया गया कि चेकों के साथ संलग्न डेबिट नोट पर न तो कोई मेमो नंबर था और न ही डिस्पैच नंबर, जो गंभीर अनियमितता की ओर इशारा करता है। बैंक द्वारा प्रस्तुत कॉल और एसएमएस लॉग ने भी मामले को संदिग्ध बना दिया है। लेनदेन से जुड़े अलर्ट मोबाइल नंबर 9812433350 पर भेजे गए, जो विकास एवं पंचायत विभाग के सुपरिंटेंडेंट प्रिंस के नाम पर पंजीकृत बताया गया है। एसीबी ने उनका बयान भी दर्ज कर लिया है।
विभाग ने चेक से भुगतान से किया इनकार
पंचायत विभाग के योजना प्रभारी ने स्पष्ट किया है कि विभाग भुगतान के लिए चेक का उपयोग नहीं करता, बल्कि केवल डेबिट नोट प्रणाली (आरटीजीएस) के जरिए ही लेनदेन होता है। जांच में यह भी सामने आया कि विभाग ने संबंधित दोनों खातों में फंड ट्रांसफर के कोई निर्देश जारी नहीं किए थे।
बताया गया है कि बैंक को 10 दिसंबर 2025 को हस्ताक्षर अपडेट पत्र प्राप्त हो चुका था, इसके बावजूद कथित जाली हस्ताक्षरों के आधार पर लेनदेन जारी रहे। डेबिट नोट पर पत्र संख्या का अभाव और संदिग्ध हस्ताक्षर पूरे प्रकरण में साजिश की आशंका को मजबूत करते हैं।
चार आरोपी सात दिन के रिमांड पर
इस मामले में गिरफ्तार चारों आरोपितों को बुधवार को पंचकूला की अदालत में पेश किया गया। अदालत ने सभी को सात दिन के रिमांड पर भेज दिया है। एसीबी ने 14 दिन के रिमांड की मांग की थी।
गिरफ्तार आरोपितों में ऋषभ ऋषि, अभय, स्वाति सिंगला और अभिषेक सिंगला शामिल हैं। आरोप है कि बैंक के पूर्व कर्मचारी अभय ने अपनी पत्नी स्वाति सिंगला और साले अभिषेक सिंगला के नाम पर ‘स्वास्तिक देश’ नाम से फर्जी कंपनी बनाकर करीब 300 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए। इस पूरे खेल में उसके सहकर्मी ऋषभ ने साथ दिया।
फिलहाल एसीबी इस बहुचर्चित घोटाले की गहराई से जांच कर रही है और आने वाले दिनों में और बड़े खुलासे संभव माने जा रहे हैं।