मिडिल ईस्ट तनाव का असर: भारत में LPG संकट के बीच सरकार के 6 बड़े फैसले
तेल सप्लाई पर बढ़ते खतरे के बीच सरकार ने LPG प्रोडक्शन बढ़ाने और सप्लाई को प्राथमिकता देने का लिया फैसला, होटल-रेस्टोरेंट इंडस्ट्री पर भी दिख रहा असर
मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष का असर अब भारत में भी दिखाई देने लगा है। एलपीजी गैस सिलेंडर की सप्लाई को लेकर लोगों के बीच चिंता बढ़ रही है। कई शहरों में गैस की उपलब्धता कम होने और बुकिंग में देरी की शिकायतें सामने आ रही हैं। ऐसे में केंद्र सरकार और तेल कंपनियों ने स्थिति को संभालने के लिए बड़े कदम उठाए हैं।
सरकार ने साफ किया है कि देश में एलपीजी की सप्लाई बनाए रखने के लिए कई अहम फैसले लिए गए हैं ताकि आम लोगों को किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े। ऊर्जा मंत्रालय और तेल कंपनियों ने मिलकर एलपीजी की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए नई रणनीति तैयार की है।
सरकार के 6 बड़े फैसले
एलपीजी संकट की आशंका को देखते हुए सरकार ने छह अहम फैसले लिए हैं।
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रिफाइनरी और पेट्रोकेमिकल यूनिट्स को एलपीजी की सप्लाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
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सरकारी और निजी रिफाइनरियों को एलपीजी का उत्पादन बढ़ाने का आदेश दिया गया है।
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पैनिक बुकिंग को रोकने के लिए सिलेंडर बुकिंग के बीच का अंतर 21 दिन से बढ़ाकर 25 दिन कर दिया गया है।
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घरेलू गैस पाइपलाइन (PNG), वाहनों की CNG और घरेलू LPG को प्राथमिकता दी जाएगी।
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कमर्शियल गैस सिलेंडर की कमी को दूर करने के लिए एक विशेष समिति का गठन किया गया है।
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अतिरिक्त एलपीजी की बिक्री फिलहाल केवल तीन सरकारी तेल कंपनियों—IOCL, BPCL और HPCL—को ही करने की अनुमति दी गई है।