मिडिल ईस्ट में बढ़ता तनाव: लेबनान में बड़े जमीनी हमले की तैयारी में इजराइल, क्या है पूरा सैन्य प्लान?
मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच इजराइल अब लेबनान में बड़े जमीनी सैन्य अभियान की तैयारी कर रहा है। इजराइली योजना के मुताबिक दक्षिणी लेबनान के उस पूरे इलाके पर नियंत्रण स्थापित करने की रणनीति बनाई जा रही है, जो लितानी नदी के दक्षिण में आता है। इसके साथ ही इजराइल वहां मौजूद हिज्बुल्लाह के सैन्य ढांचे और हथियारों के भंडार को पूरी तरह खत्म करना चाहता है।
इजराइली और अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, अगर यह अभियान शुरू होता है तो यह 2006 के युद्ध के बाद लेबनान में इजराइल का सबसे बड़ा जमीनी हमला होगा। एक वरिष्ठ इजराइली अधिकारी के मुताबिक सेना वही रणनीति अपनाने की तैयारी कर रही है, जिसका इस्तेमाल गाजा में किया गया था। यानी जिन इमारतों में हिज्बुल्लाह के हथियार छिपे होने या हमलों की तैयारी की जानकारी मिलेगी, उन्हें पूरी तरह ध्वस्त कर दिया जाएगा।
दक्षिणी लेबनान में लंबे समय तक तैनाती की संभावना
इतने बड़े सैन्य अभियान का मतलब यह भी हो सकता है कि दक्षिणी लेबनान में इजराइली सेना को लंबे समय तक तैनात रहना पड़े। इसी वजह से लेबनान की सरकार इस स्थिति को लेकर चिंतित है। उसका कहना है कि हिज्बुल्लाह द्वारा इजराइल पर रॉकेट दागे जाने के बाद शुरू हुआ यह संघर्ष पूरे देश के लिए भारी नुकसान का कारण बन सकता है।
अमेरिकी प्रशासन हिज्बुल्लाह को कमजोर करने के उद्देश्य से इजराइल के इस संभावित अभियान का समर्थन कर रहा है। हालांकि अमेरिका की कोशिश है कि लेबनान की सरकारी इमारतों और बुनियादी ढांचे को कम से कम नुकसान पहुंचे। इसके साथ ही युद्ध के बाद इजराइल और लेबनान के बीच सीधे संवाद की संभावना भी तलाश की जा रही है।
बढ़ते तनाव के पीछे क्या है वजह
कुछ समय पहले तक इजराइल की सरकार लेबनान के साथ बढ़ते तनाव को सीमित रखना चाहती थी, क्योंकि उसका मुख्य ध्यान ईरान पर था। लेकिन हालात उस समय बदल गए जब हिज्बुल्लाह ने ईरान के साथ मिलकर इजराइल पर बड़ा हमला किया।
बताया गया कि इस हमले में 200 से ज्यादा मिसाइलें दागी गईं और ईरान ने भी दर्जनों मिसाइलें छोड़ीं। एक इजराइली अधिकारी के अनुसार इस हमले से पहले लेबनान में युद्धविराम की संभावना बन रही थी, लेकिन अब बड़े सैन्य अभियान से पीछे हटना मुश्किल होता जा रहा है।
सीमा पर सेना की तैनाती बढ़ाई
इजराइली सेना पहले ही लेबनान सीमा पर तीन बख्तरबंद और पैदल सेना डिवीजन तैनात कर चुकी है। पिछले दो सप्ताह में कुछ सीमित जमीनी घुसपैठ की घटनाएं भी सामने आई हैं।
अब सेना ने सीमा पर अतिरिक्त सैनिक भेजने और रिजर्व बलों को भी बुलाने का फैसला किया है। इजराइल का मुख्य उद्देश्य दक्षिणी लेबनान के इलाके पर नियंत्रण स्थापित करना, हिज्बुल्लाह को सीमा से दूर धकेलना और गांवों में मौजूद उसके सैन्य ठिकानों तथा हथियारों के भंडार को नष्ट करना है।
हिज्बुल्लाह की चेतावनी
दूसरी ओर हिज्बुल्लाह के नेता नईम कासिम ने कहा है कि लेबनान सरकार की कूटनीतिक कोशिशें देश की संप्रभुता और नागरिकों की सुरक्षा की रक्षा करने में सफल नहीं रहीं। इसलिए अब प्रतिरोध ही एकमात्र रास्ता बचा है।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि इजराइल जमीनी हमला करता है तो यह उसके लिए जाल साबित हो सकता है, क्योंकि नजदीकी लड़ाई में हिज्बुल्लाह के लड़ाके इजराइली सेना को भारी नुकसान पहुंचा सकते हैं।
मानवीय संकट गहराया
इस संघर्ष का असर दक्षिणी लेबनान के आम लोगों पर भी गंभीर रूप से पड़ा है। बड़ी संख्या में लोग अपने घर छोड़ने को मजबूर हो गए हैं। अब तक लगभग 8 लाख लोग विस्थापित हो चुके हैं और कम से कम 773 लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें कई आम नागरिक शामिल हैं।
इसी बीच अमेरिका ने इजराइल से कहा है कि वह बेरुत स्थित अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे और अन्य सरकारी ढांचों को निशाना न बनाए। इजराइल ने एयरपोर्ट को नुकसान न पहुंचाने पर सहमति जताई है, हालांकि अन्य सरकारी ढांचों को सुरक्षित रखने को लेकर कोई स्पष्ट आश्वासन नहीं दिया गया है।
हाल ही में इजराइल ने दक्षिणी लेबनान में एक पुल पर हमला किया। इजराइल का दावा है कि हिज्बुल्लाह इसी रास्ते से हथियार और लड़ाके भेज रहा था।
कूटनीतिक कोशिशें भी जारी
इस बीच कूटनीतिक स्तर पर भी प्रयास जारी हैं। लेबनान से जुड़े मामलों को संभालने की जिम्मेदारी इजराइल ने अपने पूर्व मंत्री रॉन डर्मर को सौंपी है। वे अमेरिका के साथ संपर्क बनाए रखेंगे और यदि इजराइल और लेबनान के बीच सीधी बातचीत शुरू होती है तो उसकी प्रक्रिया भी संभालेंगे।
अमेरिका की ओर से इस मामले की जिम्मेदारी मसाद बोलोस को दी गई है। रिपोर्ट के अनुसार लेबनान सरकार ने भी संकेत दिया है कि वह बिना किसी शर्त के तत्काल युद्धविराम पर बातचीत के लिए तैयार है। अमेरिकी प्रशासन की कोशिश है कि इस संवाद के जरिए एक व्यापक समझौता हो सके और 1948 से चली आ रही इजराइल और लेबनान के बीच युद्ध की स्थिति को औपचारिक रूप से समाप्त किया जा सके।