India-China Relations: ’12 चीनी नाविकों को बचाने का एहसान नहीं भूलेंगे’, भारतीय सेना की तारीफ में बोले चीन के रक्षा अधिकारी
नई दिल्ली: भारत में चीन के नए रक्षा अताशे रियर एडमिरल यू जियान ने भारतीय सेना के प्रति सार्वजनिक रूप से आभार व्यक्त करते हुए कहा है कि केरल तट के पास दुर्घटनाग्रस्त कार्गो जहाज से 12 चीनी नाविकों की जान बचाने की मदद को चीन कभी नहीं भूलेगा। उन्होंने भारत-चीन संबंधों में सुधार, सैन्य संवाद और आपसी सहयोग बढ़ाने की भी वकालत की।
भारतीय सेना के बचाव अभियान की सराहना
रियर एडमिरल यू जियान ने यह टिप्पणी मंगलवार को चीनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) की 99वीं वर्षगांठ के अवसर पर आयोजित एक कार्यक्रम में की। उन्होंने कहा कि पिछले वर्ष जून में केरल तट के पास आग और विस्फोट की चपेट में आए एक मालवाहक जहाज से भारतीय सेना ने 12 चीनी चालक दल के सदस्यों को सुरक्षित बचाया था। उन्होंने कहा कि चीन इस सहायता को हमेशा याद रखेगा।
भारत-चीन के साझा हित अधिक महत्वपूर्ण
अपने संबोधन में यू जियान ने कहा कि भारत और चीन महत्वपूर्ण पड़ोसी देश हैं और दोनों ही विकास तथा राष्ट्रीय पुनर्निर्माण के अहम दौर से गुजर रहे हैं। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के नेताओं के रणनीतिक मार्गदर्शन में द्विपक्षीय संबंध फिर से सुधार और सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि चीन का मानना है कि भारत और चीन के साझा हित दोनों देशों के बीच मौजूद मतभेदों की तुलना में कहीं अधिक व्यापक और महत्वपूर्ण हैं।
सैन्य और राजनयिक संवाद बढ़ाने की इच्छा
चीनी रक्षा अधिकारी ने कहा कि उनका देश भारत के साथ राजनयिक और सैन्य स्तर पर निरंतर संवाद बनाए रखना चाहता है। उन्होंने बातचीत के माध्यम से आपसी विश्वास बढ़ाने, सहयोग मजबूत करने और दोनों देशों की जनता के हित में मिलकर काम करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
यू जियान ने अपने संबोधन के अंत में भारत-चीन संबंधों में लगातार सुधार और सकारात्मक प्रगति की कामना भी की।
संयुक्त राष्ट्र मिशनों का भी किया जिक्र
रियर एडमिरल ने कहा कि भारतीय और चीनी सेनाओं ने संयुक्त राष्ट्र के शांति अभियानों में महत्वपूर्ण योगदान दिया है और इस दौरान दोनों देशों के सैनिकों ने उल्लेखनीय बलिदान भी दिए हैं। उन्होंने इसे दोनों सेनाओं के बीच सहयोग का सकारात्मक उदाहरण बताया।
हाल के महीनों में संबंधों में दिखा सुधार
हाल के समय में भारत और चीन के बीच संबंधों में सुधार के संकेत देखने को मिले हैं। दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व की मुलाकातों के बाद वरिष्ठ अधिकारियों के बीच कई दौर की बैठकें हुई हैं। दोनों पक्षों के बीच द्विपक्षीय संबंधों को सामान्य बनाने और रचनात्मक संवाद आगे बढ़ाने के प्रयास जारी हैं।