UPI मॉडल पर बनेगा भारत का AI ‘बुके’, कृषि से हेल्थ तक सेक्टर-वाइज समाधान; 200 अरब डॉलर निवेश का रोडमैप

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देश को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में वैश्विक हब बनाने की दिशा में बड़ा ऐलान किया गया है। अश्विनी वैष्णव ने नई दिल्ली में आयोजित दुनिया के सबसे बड़े एआई इंपैक्ट समिट 2026 में बताया कि भारत जल्द ही एआई मिशन 2.0 लॉन्च करेगा। इसके तहत कृषि, शिक्षा, स्वास्थ्य, स्किलिंग, एमएसएमई समेत कई क्षेत्रों के लिए सेक्टर-स्पेसिफिक एआई मॉडल विकसित किए जाएंगे, जो भारत की विभिन्न भाषाओं में उपलब्ध होंगे।

मंत्री ने कहा कि यह पूरा ढांचा Unified Payments Interface (UPI) की तरह एक ‘बुके’ प्लेटफॉर्म के रूप में होगा, जहां अलग-अलग जरूरतों के मुताबिक एआई सॉल्यूशन उपलब्ध रहेंगे। छोटे उद्यमियों, किसानों, छात्रों, महिलाओं और युवाओं को उनकी आवश्यकता के अनुरूप एआई सेवाएं मुफ्त में देने का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने भरोसा जताया कि भारत का यह मॉडल विश्वसनीय और सर्वसुलभ होगा।

दो साल में 200 अरब डॉलर निवेश का अनुमान

समिट के दौरान मंत्री ने कहा कि एआई सेक्टर में अगले दो वर्षों में 200 अरब डॉलर का निवेश होने की संभावना है। अब तक स्टार्टअप्स में 70 अरब डॉलर का निवेश हो चुका है। उन्होंने भारत मंडपम में ‘वेब्स क्रिएटर्स कॉर्नर’ का उद्घाटन भी किया और कहा कि भारत एआई के सकारात्मक उपयोग को लेकर वैश्विक सहमति बनाने की दिशा में प्रयासरत है।

मंत्री के मुताबिक पिछले दो दिनों में ढाई लाख से अधिक बच्चों ने एआई का गलत इस्तेमाल न करने की शपथ ली है। स्कूल पाठ्यक्रम में भी एआई को शामिल किया जा रहा है ताकि विद्यार्थी इसके फायदे और जोखिम दोनों को समझ सकें।

इंफ्रास्ट्रक्चर और क्लीन एनर्जी पर फोकस

भारत एआई सेक्टर में वैश्विक नेतृत्व के लिए जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर पर भी जोर दे रहा है। इसमें क्लीन एनर्जी की उपलब्धता प्रमुख है। समिट के दौरान दुनिया के देशों के लिए एआई सुविधाओं को साझा करने को लेकर एक सहमति पत्र तैयार करने की भी पहल की जा रही है।

OTT प्लेटफॉर्म को संस्कृति का रखना होगा ध्यान

मंत्री ने Netflix समेत अन्य ओटीटी प्लेटफॉर्म को कंटेंट निर्माण में भारत की सांस्कृतिक संवेदनशीलताओं का सम्मान करने की नसीहत दी। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी विदेशी इंटरनेट मीडिया प्लेटफॉर्म को भारत के वैधानिक ढांचे के नियमों का पालन करना होगा।

डीपफेक वीडियो पर और सख्ती की जरूरत बताते हुए उन्होंने कहा कि इस विषय पर इंडस्ट्री के साथ संवाद जारी है। साथ ही भारत इंटरनेट मीडिया उपयोग के लिए न्यूनतम आयु सीमा तय करने पर भी विचार कर रहा है। कई देशों में 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया उपयोग पर प्रतिबंध लागू है, और भारत भी इस दिशा में विभिन्न हितधारकों से परामर्श कर रहा है।

 

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