भारत की पहली मेड इन इंडिया बुलेट ट्रेन जल्द दौड़ेगी पटरी पर, मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड कॉरिडोर पर 2027 में शुरू हो सकता है सफर

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भारत की पहली हाई-स्पीड रेल परियोजना को लेकर बड़ी प्रगति की खबर सामने आई है। मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन कॉरिडोर पर अब स्वदेशी तकनीक से तैयार की जा रही पहली मेड इन इंडिया बुलेट ट्रेन चलाने की तैयारी है। सरकार की ओर से संकेत दिए गए हैं कि ‘बी28’ नाम से तैयार किया जा रहा यह ट्रेनसेट अगस्त 2027 तक संचालन के लिए तैयार हो सकता है। इस पहल से देश में हाई-स्पीड रेल नेटवर्क के विकास के साथ स्वदेशी तकनीक को भी मजबूत बढ़ावा मिलेगा।

पहले इस सेक्शन पर शुरू होगा संचालन

रेल मंत्रालय की ओर से संसद की स्थायी समिति को दी गई रिपोर्ट में बताया गया है कि बुलेट ट्रेन का पहला संचालन सूरत से वापी के बीच लगभग 97 किलोमीटर लंबे हिस्से में शुरू किया जाएगा। यह हिस्सा मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल परियोजना का पहला परिचालन खंड होगा।

‘बी28’ ट्रेनसेट की अधिकतम गति लगभग 280 किलोमीटर प्रति घंटा तक होगी। इससे यात्रियों को बेहद तेज और आरामदायक यात्रा का अनुभव मिलने की उम्मीद है।

स्वदेशी बी28 ट्रेनसेट को क्यों चुना गया

परियोजना की शुरुआत में इस कॉरिडोर के लिए जापान की शिंकानसेन तकनीक को अपनाया गया था। लेकिन जापान फिलहाल नई ‘ई10’ सीरीज ट्रेन विकसित कर रहा है और उसकी तैनाती की समयसीमा स्पष्ट नहीं है।

इसी वजह से शुरुआती चरण में संचालन के लिए स्वदेशी ‘बी28’ ट्रेनसेट का उपयोग करने का निर्णय लिया गया है। इन ट्रेनों का निर्माण भारत की सरकारी कंपनी बीईएमएल कर रही है। इससे देश में हाई-स्पीड रेल तकनीक के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

सिग्नलिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर पर तेजी से काम

रेल मंत्रालय के अनुसार परियोजना के तहत आधुनिक सिग्नलिंग प्रणाली पर भी तेजी से काम किया जा रहा है। इसके लिए ईटीसीएस लेवल-2 तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा, जो दुनिया भर में हाई-स्पीड रेल संचालन के लिए उपयोग में लाई जाती है।

इसके अलावा परियोजना से जुड़े कई महत्वपूर्ण कार्य भी तेजी से जारी हैं। इनमें हाई-स्पीड ट्रैक बिछाना, सिविल संरचनाओं का निर्माण, बिजली आपूर्ति की व्यवस्था, सिग्नलिंग और दूरसंचार नेटवर्क तैयार करना तथा ट्रेनसेट की आपूर्ति शामिल है।

क्यों बढ़ी परियोजना की लागत

जब इस महत्वाकांक्षी परियोजना की शुरुआत वर्ष 2015 में हुई थी, तब इसकी अनुमानित लागत करीब 97,636 करोड़ रुपये थी। लेकिन समय के साथ कई अतिरिक्त खर्च जुड़ने के कारण परियोजना की लागत में वृद्धि हुई है।

लागत बढ़ने के प्रमुख कारणों में कर और सेस, यूटिलिटी शिफ्टिंग, स्टेशनों के एप्रोच मार्ग का विकास, बिजली आपूर्ति और नई तकनीक का इस्तेमाल शामिल हैं। इसके अलावा भूमि अधिग्रहण और पुनर्वास पर भी करीब 16,695 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। मुंबई जैसे बड़े शहरों में जमीन की ऊंची कीमतें भी लागत बढ़ने का एक बड़ा कारण मानी जा रही हैं।

इंटरसिटी यात्रा में आएगा बड़ा बदलाव

मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना भारत की पहली हाई-स्पीड रेल लाइन है और इसे देश की सबसे महत्वाकांक्षी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में शामिल किया जाता है।

परियोजना पूरी होने के बाद मुंबई और अहमदाबाद के बीच यात्रा का समय काफी कम हो जाएगा। साथ ही भारत को हाई-स्पीड रेल तकनीक के क्षेत्र में नई पहचान मिलने की उम्मीद है।

 

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