US टैरिफ और ईरान संकट के बीच भारत का कमाल, FY26 में रिकॉर्ड $860 अरब का निर्यात; नए बाजारों में मजबूत पकड़ से बढ़ी वैश्विक ताकत

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वैश्विक स्तर पर चल रहे भू-राजनीतिक तनाव, अमेरिका के नए टैरिफ नियमों और ईरान-अमेरिका संकट के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था ने बड़ी उपलब्धि हासिल की है। दुनिया भर में सप्लाई चेन प्रभावित होने के बावजूद भारत ने न सिर्फ स्थिर प्रदर्शन किया, बल्कि निर्यात के क्षेत्र में रिकॉर्ड स्तर छू लिया है।

FY26 में भारत का कुल निर्यात $860 अरब के पार

ताजा आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का कुल निर्यात 860.09 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। यह पिछले वित्त वर्ष 2024-25 के 825.26 अरब डॉलर के मुकाबले 4.22 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्शाता है। यह वृद्धि ऐसे समय में दर्ज की गई है जब वैश्विक व्यापार कई चुनौतियों का सामना कर रहा है।

कृषि, मैन्युफैक्चरिंग और समुद्री उत्पादों ने बढ़ाया निर्यात

मार्च 2026 के आंकड़ों के मुताबिक, भारत के कृषि उत्पाद, खनिज, मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर और सी-फूड निर्यात में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इन क्षेत्रों ने कुल निर्यात वृद्धि में अहम योगदान दिया है और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भारत की पकड़ को और मजबूत किया है।

सर्विस सेक्टर में भी मजबूत प्रदर्शन

केवल वस्तु निर्यात ही नहीं, बल्कि सेवा क्षेत्र में भी भारत ने मजबूत प्रदर्शन किया है। वित्त वर्ष 2025-26 में सेवा निर्यात में 7.94 प्रतिशत की वृद्धि का अनुमान है। खास बात यह है कि भारत ने अब केवल अमेरिका और यूरोप तक सीमित न रहते हुए सिंगापुर, मलेशिया, चीन और तंजानिया जैसे नए बाजारों में भी अपनी सेवाओं का विस्तार किया है।

आयात में गिरावट से व्यापार घाटे को राहत

आयात के मोर्चे पर भी अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत मिले हैं। हाल के महीनों में कई प्रमुख कैटेगरी में आयात में कमी दर्ज की गई है। विशेष रूप से पेट्रोलियम और कच्चे तेल के आयात में 35.91 प्रतिशत की भारी गिरावट देखने को मिली है। आयात घटने और निर्यात बढ़ने से देश के व्यापार घाटे को नियंत्रित करने में मदद मिली है।

संकट के बीच कैसे मिली सफलता

विशेषज्ञों के अनुसार, अमेरिका-ईरान तनाव और वैश्विक सप्लाई चेन में आई बाधाओं के बीच भारत ने अपनी रणनीतिक व्यापार नीति में लचीलापन दिखाया। देश ने पारंपरिक बाजारों के साथ-साथ अफ्रीका और दक्षिण-पूर्व एशिया जैसे उभरते बाजारों पर फोकस बढ़ाया, जिसका सीधा फायदा निर्यात वृद्धि के रूप में देखने को मिला।

 

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