भारत को ब्रह्मोस से भी घातक हथियार देगा इजरायल, PM मोदी के दौरे पर होंगे ये ऐतिहासिक रक्षा समझौते

0 12

नई दिल्ली : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इजरायल यात्रा केवल कूटनीतिक शिष्टाचार तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारत की सैन्य शक्ति को एक नई दिशा देने वाली साबित हो रही है। बुधवार को तेल अवीव पहुंचते ही यह स्पष्ट हो गया कि दोनों देश एक ऐसे ऐतिहासिक रक्षा समझौते की दहलीज पर हैं, जो सुरक्षा संबंधों को अभूतपूर्व ऊंचाइयों पर ले जाएगा। इस बार जोर हथियारों की खरीद पर नहीं, बल्कि उन ‘एक्सक्लूसिव’ तकनीकों के हस्तांतरण पर है, जिन्हें इजरायल ने अब तक किसी अन्य देश को साझा नहीं किया है।

इजरायली संसद ‘नेसेट’ में अपने संबोधन के दौरान पीएम मोदी ने इस साझेदारी की गंभीरता को रेखांकित करते हुए कहा, “आज की अनिश्चित दुनिया में, भारत और इजरायल जैसे भरोसेमंद साझेदारों के बीच एक मजबूत रक्षा साझेदारी अत्यंत महत्वपूर्ण है।”

भारत सरकार का लक्ष्य 2035 तक पूरे देश के लिए एक बहुस्तरीय मिसाइल शील्ड तैयार करना है, जिसे ‘सुदर्शन चक्र’ नाम दिया गया है। भारत की 15,106 किमी लंबी भूमि सीमा और 7,516 किमी लंबी तटरेखा को सुरक्षित करने के लिए मौजूदा रूसी S-400, इजरायली बराक और स्वदेशी आकाश सिस्टम के साथ अब इजरायल की अत्याधुनिक तकनीक को जोड़ा जाएगा।

सूत्रों के अनुसार, पाकिस्तान के साथ पिछले संघर्षों के अनुभवों, विशेष रूप से ड्रोन हमलों और लंबी दूरी की चीनी मिसाइलों के खतरे को देखते हुए भारत इजरायल से ‘आयरन डोम’ (Iron Dome) और ‘आयरन बीम’ (Iron Beam) जैसी तकनीक हासिल करना चाहता है। ‘मेक इन इंडिया’ के तहत इन प्रणालियों का भारत में निर्माण रणनीतिक रूप से गेम-चेंजर साबित होगा।

इसमें इजरायल एयरोस्पेस इंडस्ट्रीज (IAI) के ‘एरो’ (Arrow) मिसाइल डिफेंस सिस्टम, राफेल के ‘डेवि़ड्स स्लिंग’ (जो 300 किमी तक की मिसाइलों और ड्रोन को रोकने में सक्षम है) और लेजर-आधारित ‘आयरन बीम’ पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। विशेष बात यह है कि आयरन बीम से एक शॉट दागने की लागत मात्र 2 डॉलर आती है, जो इसे बेहद किफायती बनाता है।

आक्रामक हथियार
भारत की मारक क्षमता को बढ़ाने के लिए ‘रैम्पेज’ (Rampage) एयर-टू-ग्राउंड मिसाइल, ‘आइस ब्रेकर’ नेवल क्रूज मिसाइल और सुपरसोनिक ‘एयर लोरा’ (Air LORA) मिसाइलों पर भी करार होने की संभावना है।

रक्षा विशेषज्ञों की नजर ‘गोल्डन होराइजन’ (Golden Horizon) पर टिकी है। यह एक ऐसी मिसाइल है जिसे विमानों से लॉन्च किया जा सकता है और इसे भारतीय वायुसेना के सुखोई-30MKI जेट के साथ आसानी से जोड़ा जा सकता है। मच 5 (ध्वनि की गति से पांच गुना) की रफ्तार वाली यह मिसाइल भारत की ‘ब्रह्मोस’ (मच 3) से भी कहीं अधिक तेज है। यह दुश्मन के भूमिगत बंकरों और परमाणु ठिकानों को भी भेदने की क्षमता रखती है, जिससे इसे इंटरसेप्ट करना लगभग असंभव हो जाता है।

रक्षा उपकरणों से परे एक बड़ी घोषणा एक नए सुरक्षा गठबंधन को लेकर हो सकती है। इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतनयाहू ने अपने मंत्रिमंडल को संकेत दिया है कि वह भारत को एक गठबंधन के षट्कोण (Hexagon of Alliances) के रूप में देखते हैं। इसमें अरब देशों, अफ्रीकी देशों, ग्रीस, साइप्रस और एशियाई देशों (भारत) को शामिल करने की योजना है, ताकि क्षेत्र में कट्टरपंथी ताकतों और अस्थिरता के खिलाफ एक संयुक्त मोर्चा बनाया जा सके।

नोट: अगर आपको यह खबर पसंद आई तो इसे शेयर करना न भूलें, देश-विदेश से जुड़ी ताजा अपडेट पाने के लिए कृपया Vnation के Facebook पेज को LikeTwitter पर Follow करना न भूलें...
Leave A Reply

Your email address will not be published.