मिडिल ईस्ट में जारी तनाव और ईरान युद्ध का असर अब आम लोगों की रसोई तक पहुंच गया है। ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ पर संकट के चलते एलपीजी सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ी है, जिसके कारण भारत में लोग तेजी से वैकल्पिक साधनों की ओर रुख कर रहे हैं। सबसे ज्यादा चर्चा में इस वक्त इंडक्शन कुकटॉप है, जिसकी मांग अचानक कई गुना बढ़ गई है।
इंडक्शन बनाम LPG: कितना सस्ता पड़ता है?
खाना बनाने की लागत की बात करें तो इंडक्शन कुकटॉप एलपीजी के मुकाबले औसतन करीब 15-20% तक सस्ता पड़ सकता है, खासकर तब जब बिजली दरें नियंत्रित हों।
एलपीजी सिलेंडर की कीमत लगातार बढ़ने और सप्लाई अनिश्चित होने के कारण इंडक्शन एक किफायती विकल्प बनता जा रहा है। हालांकि जहां बिजली महंगी है या कटौती ज्यादा होती है, वहां एलपीजी अभी भी भरोसेमंद विकल्प बना रहता है।
इंडक्शन की मांग में जबरदस्त उछाल
देश में इंडक्शन कुकटॉप की बिक्री में अचानक उछाल आया है। भारत के साथ-साथ श्रीलंका और फिलीपींस जैसे देशों में भी इसकी मांग तेजी से बढ़ी है। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि इससे बिजली ग्रिड पर अतिरिक्त दबाव भी बढ़ रहा है।
बायोगैस: घर-घर बन रही ‘अपनी गैस’
किचन वेस्ट से गैस बनाने वाला बायोगैस सिस्टम भी तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। कई शहरों में कंपनियां और कैंपस रोजाना टनों फूड वेस्ट से गैस तैयार कर रहे हैं। घरों में छोटा सेटअप 2,000 से 10,000 रुपये में लगाया जा सकता है, जिससे रोज 1-2 घंटे खाना पकाने लायक गैस मिल जाती है।
सोलर कुकर: मुफ्त ऊर्जा का विकल्प
गुजरात समेत कई राज्यों में लोग सोलर कुकर की ओर भी बढ़ रहे हैं। 1,000 से 5,000 रुपये की लागत वाले ये कुकर धूप से चलते हैं, जिससे गैस या बिजली की जरूरत नहीं पड़ती। हालांकि इनका इस्तेमाल मौसम और धूप पर निर्भर करता है।
PNG: शहरों में उभरता स्थायी समाधान
सरकार पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) को बढ़ावा दे रही है और करोड़ों घरों को इससे जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है। जहां यह सुविधा उपलब्ध है, वहां एलपीजी की तुलना में यह सस्ता और निरंतर सप्लाई वाला विकल्प साबित हो रहा है।
पारंपरिक ईंधन की वापसी
ऊर्जा संकट के बीच कई देशों में लकड़ी और कोयले जैसे पारंपरिक ईंधनों की वापसी भी देखी जा रही है। भारत के ग्रामीण इलाकों में गोबर गैस यानी पारंपरिक बायोगैस का इस्तेमाल फिर बढ़ रहा है।
क्या चुनें? समझें आसान भाषा में
अगर आपके इलाके में बिजली सस्ती और नियमित है तो इंडक्शन सबसे किफायती विकल्प हो सकता है।
अगर स्थायी और लगातार सप्लाई चाहिए तो PNG बेहतर रहेगा।
गांव या छोटे शहरों में बायोगैस और सोलर कुकर अच्छे विकल्प बन सकते हैं।