टेक दिग्गज Microsoft ने अपने एआई टूल Copilot को लेकर उपयोग की शर्तों में अहम बदलाव किया है। कंपनी ने साफ किया है कि कोपायलट को “केवल मनोरंजन के उद्देश्य” से इस्तेमाल करने की बात कही गई है और इसके उपयोग से जुड़े जोखिम की जिम्मेदारी यूजर की होगी।
अब तक कोपायलट को माइक्रोसॉफ्ट 365 जैसे प्रोडक्टिविटी टूल्स—जैसे एक्सेल और पावरपॉइंट—में काम आसान बनाने वाले सहायक के रूप में पेश किया जाता रहा है, लेकिन नए अपडेट ने इसके उपयोग को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
शर्तों में बदलाव के पीछे क्या वजह?
माइक्रोसॉफ्ट की आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, उपयोग की शर्तों में यह बदलाव पिछले साल अक्टूबर में किया गया था। दरअसल, एआई मॉडल्स—जैसे GPT और Claude—में “हैलुसिनेशन” यानी गलत या मनगढ़ंत जानकारी देने की समस्या देखी गई है।
ऐसे में कंपनी ने खुद को संभावित कानूनी जोखिम से बचाने के लिए यह कदम उठाया है। नई शर्तों से यह स्पष्ट संकेत मिलता है कि एआई द्वारा दी गई जानकारी में त्रुटि होने की स्थिति में उसकी जिम्मेदारी कंपनी नहीं लेगी।
काम के लिए इस्तेमाल पर रोक नहीं, लेकिन सावधानी जरूरी
कंपनी ने यह नहीं कहा है कि यूजर्स को कोपायलट का इस्तेमाल काम के लिए बंद कर देना चाहिए। बल्कि माइक्रोसॉफ्ट का जोर इस बात पर है कि इसे एक सहायक टूल की तरह इस्तेमाल किया जाए, न कि अंतिम निर्णय लेने वाले माध्यम के रूप में।
यूजर्स को सलाह दी गई है कि किसी भी महत्वपूर्ण काम या फैसले से पहले कोपायलट द्वारा दी गई जानकारी की पुष्टि जरूर करें।
बढ़ रही है कोपायलट की पहुंच और उपयोग
माइक्रोसॉफ्ट लगातार कोपायलट को प्रोडक्टिविटी बढ़ाने वाले टूल के रूप में प्रमोट कर रहा है। कंपनी के आंतरिक आंकड़ों के अनुसार, हाल के समय में इसकी बिक्री और उपयोग में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। हालांकि 31 दिसंबर 2025 तक केवल 3 प्रतिशत ग्राहक ही इसके लिए भुगतान कर रहे थे।
नए AI टूल्स और ‘वाइब वर्किंग’ पर फोकस
इस साल की शुरुआत में माइक्रोसॉफ्ट ने Copilot Cowork भी पेश किया, जो एआई के जरिए टीम वर्क और प्रोडक्टिविटी को बेहतर बनाने पर केंद्रित है। यह टूल Anthropic के Claude Cowork मॉडल से प्रेरित है।
कंपनी ने हाल के समय में “वाइब वर्किंग” जैसे नए कॉन्सेप्ट को भी बढ़ावा दिया है, जिसका मतलब है—काम करने के लिए एआई का स्मार्ट तरीके से इस्तेमाल।
AI पर बढ़ती निर्भरता के बीच सतर्कता का संकेत
विशेषज्ञों का मानना है कि माइक्रोसॉफ्ट का यह कदम एआई टेक्नोलॉजी की सीमाओं और जोखिमों को स्वीकार करने की दिशा में एक अहम संकेत है। तेजी से बढ़ते एआई उपयोग के बीच यह साफ हो गया है कि तकनीक अभी पूरी तरह त्रुटिरहित नहीं है और अंतिम निर्णय इंसानों को ही लेना होगा।