लखनऊ के मलिहाबाद में 16 साल से लापता शिवनाथ के घर अचानक लौटने की खबर ने पूरे परिवार के लिए खुशी और भावनाओं का तूफान ला दिया। शिवनाथ 16 साल पहले घर से मजदूरी करने निकले थे और वापस नहीं लौटे। परिवार ने उन्हें मरा समझकर उम्मीद छोड़ दी थी।
घर लौटते ही मां-भाई की आंखों से बह निकले आंसू
रविवार को शिवनाथ अचानक अपने घर पहुंचे। उन्हें देखते ही मां कलावती देवी और भाई वीरेंद्र कुमार भावुक होकर रो पड़े। परिवार ने 16 सालों की टीस को पलभर में भुला दिया। घर में ऐसा माहौल बन गया जैसे कोई त्योहार मनाया जा रहा हो।
शिवनाथ ने बताई पूरी कहानी
रहीमाबाद के रूसेना खेड़ा गांव के रहने वाले शिवनाथ ने बताया कि घर से मजदूरी के लिए निकले थे। पहले हरदोई और मुजफ्फरनगर में काम किया, लेकिन वहां दिहाड़ी नहीं मिलने पर भाग निकले। मेरठ में एक व्यापारी राजेंद्र चौधरी और उसके बेटे राहुल चौधरी ने उन्हें भैंसों के तबेले में बंधक बना लिया और मजदूरी के पैसे नहीं दिए। रोज़ दूध निकालने, गोबर उठाने और अन्य काम कराए जाते थे।
भागकर घर लौटे
शिवनाथ ने बताया कि उनके साथी रिंकू ने 500 रुपये देकर उन्हें मदद की। इसके बाद वे घर की दीवार फांदकर मेरठ रेलवे स्टेशन पहुंचे और ट्रेन से आलमनगर स्टेशन आए। अंततः पैदल चलकर रविवार को अपने घर पहुंच गए।
भाई ने कहा, अब करेंगे शिकायत
वीरेंद्र कुमार ने बताया कि परिवार अब बहुत खुश है। मां की पुकार भगवान ने सुन ली। हालांकि अब वे गांव के प्रतिनिधियों के साथ थाने जाकर मामले की शिकायत दर्ज कराएंगे ताकि दोषियों के खिलाफ कार्रवाई हो सके।
संक्षेप में:
16 सालों की गुमशुदगी और टीस के बाद शिवनाथ का घर लौटना परिवार के लिए खुशी और राहत का पल है। मां के आंसू और घर का उत्सव यह दिखाते हैं कि परिवार के लिए पुत्र हमेशा बच्चा ही रहता है।
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