मुंबई: बॉलीवुड अभिनेत्री भाग्यश्री एक बार फिर अपने हेल्थ और फिटनेस टिप्स को लेकर चर्चा में हैं। फिल्मों से दूर रहने के बावजूद वह सोशल मीडिया पर नियमित रूप से स्वास्थ्य से जुड़ी जानकारी साझा करती रहती हैं। इस बार उन्होंने महिलाओं में तेजी से बढ़ रही हार्मोनल समस्या पीसीओएस (पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम) को लेकर एक खास घरेलू उपाय बताया है। अभिनेत्री के मुताबिक, मुलेठी की चाय पीसीओएस के लक्षणों को नियंत्रित करने में मददगार साबित हो सकती है।
पीसीओएस महिलाओं में होने वाली एक सामान्य हार्मोनल समस्या है, जिसमें अनियमित पीरियड्स, चेहरे पर अनचाहे बाल, मुंहासे और वजन बढ़ने जैसी परेशानियां देखने को मिलती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि संतुलित खानपान और स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर इस समस्या को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।
मुलेठी की चाय को बताया फायदेमंद
भाग्यश्री ने अपने सोशल मीडिया वीडियो में बताया कि मुलेठी एंड्रोजन हार्मोन के स्तर को संतुलित करने में मदद कर सकती है। एंड्रोजन का बढ़ा हुआ स्तर पीसीओएस से जुड़ी कई समस्याओं का कारण माना जाता है। उनका कहना है कि नियमित रूप से मुलेठी की चाय का सेवन करने से कुछ लक्षणों में राहत मिल सकती है।
ऐसे तैयार करें मुलेठी की चाय
मुलेठी की चाय बनाने के लिए मुलेठी की जड़ का एक छोटा टुकड़ा लें। इसे एक कप पानी में डालकर 5 से 7 मिनट तक धीमी आंच पर उबालें। इसके बाद पानी को छानकर गुनगुना ही पी लें। भाग्यश्री के अनुसार, यह आसान घरेलू पेय पीसीओएस को नियंत्रित करने में सहायक हो सकता है।
पीसीओएस कंट्रोल करने के लिए अपनाएं ये आदतें
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, केवल घरेलू उपायों पर निर्भर रहने के बजाय जीवनशैली में सुधार करना भी बेहद जरूरी है। पीसीओएस से जूझ रही महिलाओं को अपनी डाइट में फल, हरी सब्जियां, साबुत अनाज, दालें, मेवे और बीज शामिल करने चाहिए। इसके साथ ही शरीर में विटामिन-डी की पर्याप्त मात्रा बनाए रखने के लिए नियमित धूप लेना भी फायदेमंद माना जाता है।
व्यायाम और योग भी हैं जरूरी
विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि सप्ताह में कम से कम 150 मिनट शारीरिक गतिविधि या व्यायाम जरूर करना चाहिए। योग, ध्यान और तनाव कम करने वाली गतिविधियां हार्मोन संतुलन बनाए रखने में मदद कर सकती हैं। साथ ही रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट और अत्यधिक प्रोसेस्ड फूड का सेवन कम करना भी लाभकारी माना जाता है।
कई अन्य बीमारियों का खतरा भी होता है कम
स्वस्थ जीवनशैली अपनाने से न केवल पीसीओएस के लक्षणों में सुधार होता है, बल्कि वजन नियंत्रित रखने, प्रजनन क्षमता बेहतर करने और टाइप-2 डायबिटीज, हृदय रोग तथा स्ट्रोक जैसी गंभीर बीमारियों के जोखिम को कम करने में भी मदद मिल सकती है।