National Herald Case : दिल्ली कोर्ट ने गांधी परिवार के खिलाफ ईडी की चार्जशीट पर संज्ञान लेने से किया इनकार
National Herald Case : नेशनल हेराल्ड मामले में कांग्रेस नेतृत्व को बड़ी राहत देते हुए दिल्ली की एक विशेष अदालत ने मंगलवार को प्रवर्तन निदेशालय की मनी लॉन्ड्रिंग चार्जशीट पर संज्ञान लेने से इनकार कर दिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि वर्तमान परिस्थितियों में ईडी की ओर से दाखिल आरोप पत्र पर आगे बढ़ना कानूनन उचित नहीं है। विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने ने आदेश सुनाते हुए कहा कि ईडी की यह चार्जशीट किसी मूल अपराध की प्राथमिकी पर आधारित नहीं है, बल्कि एक निजी व्यक्ति की शिकायत के आधार पर शुरू की गई जांच पर टिकी हुई है। ऐसे में इस स्तर पर अदालत द्वारा संज्ञान लेना विधि सम्मत नहीं माना जा सकता।
अदालत की अहम टिप्पणी
अदालत ने कहा कि दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा पहले ही इस मामले में प्राथमिकी दर्ज कर चुकी है। जब तक उस प्राथमिकी से जुड़े तथ्यों और कानूनी पहलुओं पर स्पष्टता नहीं आ जाती, तब तक ईडी की चार्जशीट पर गुण-दोष के आधार पर विचार करना जल्दबाजी होगी। न्यायाधीश ने आदेश के ऑपरेटिव हिस्से को पढ़ते हुए कहा कि ईडी की दलीलों पर फिलहाल विचार करना समय से पहले है और इस कारण चार्जशीट पर संज्ञान नहीं लिया जा सकता।
ईडी के आरोप क्या हैं
प्रवर्तन निदेशालय ने अपनी चार्जशीट में कांग्रेस नेताओं सोनिया गांधी और राहुल गांधी के साथ ही दिवंगत पार्टी नेताओं मोतीलाल वोरा और ऑस्कर फर्नांडिस को आरोपी बनाया है। इसके अलावा सुमन दुबे, सैम पित्रोदा और निजी कंपनी ‘यंग इंडियन’ को भी इस मामले में नामजद किया गया है। ईडी का आरोप है कि इन सभी ने आपराधिक साजिश के तहत मनी लॉन्ड्रिंग को अंजाम दिया और ‘एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड’ की भारी भरकम संपत्तियों पर अवैध तरीके से नियंत्रण हासिल किया।
संपत्तियों और शेयरहोल्डिंग को लेकर दावा
जांच एजेंसी के अनुसार एजेएल की करीब रुपये 2000 करोड़ मूल्य की संपत्तियां इस कथित साजिश का केंद्र रहीं। ईडी का दावा है कि ‘यंग इंडियन’ कंपनी में गांधी परिवार की 76 प्रतिशत हिस्सेदारी थी और इसी कंपनी के जरिये एजेएल की संपत्तियों को अपने कब्जे में लिया गया। ईडी का यह भी आरोप है कि रुपये 90 करोड़ के कथित ऋण के बदले एजेएल की संपत्तियों को ‘फर्जी और धोखाधड़ीपूर्ण तरीके’ से हस्तांतरित कराया गया, जो मनी लॉन्ड्रिंग के दायरे में आता है।