सात फरवरी को होगा राष्ट्रीय दलहन सम्मेलन, केंद्रीय कृषि मंत्री समेत नौ राज्यों के मंत्री होंगे शामिल

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सीहोर : 7 फरवरी को सीहोर के अमलाहा क्षेत्र में देश की कृषि, राजनीति और अनुसंधान का प्रमुख केंद्र बनने जा रहा है। इस अवसर पर राष्ट्रीय दलहन सम्मेलन का आयोजन किया जाएगा, जिसमें देश के 9 प्रमुख राज्यों के कृषि मंत्री भाग लेंगे। सम्मेलन का उद्देश्य दलहन उत्पादन बढ़ाना, किसानों की आय में सुधार करना और नई कृषि तकनीकों पर विचार-विमर्श करना है। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान और राज्य कृषि मंत्री भागीरथ चौधरी की अध्यक्षता में यह आयोजन बड़े पैमाने पर होगा।

सम्मेलन में दलहन अनुसंधान से जुड़े वैज्ञानिक, बीज उत्पादक संस्थाएं, दाल उद्योग के प्रतिनिधि और विशेषज्ञ शामिल होंगे। ये सभी देश को दलहन क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में रणनीतियां और योजनाएं तैयार करेंगे। कार्यक्रम में नई तकनीक, उन्नत बीज और फसल सुरक्षा के उपायों का भी प्रदर्शन किया जाएगा।

सम्मेलन में मध्य प्रदेश से एदल सिंह कंसाना, उत्तर प्रदेश से सूर्य प्रताप शाही, पंजाब से सरदार गुरमीत सिंह खुडियन, हरियाणा से श्याम सिंह राणा, छत्तीसगढ़ से रामविचार नेताम, बिहार से राम कृपाल यादव, गुजरात से रमेशभाई कटारा, ओडिशा से कनक वर्धन सिंह देव और पश्चिम बंगाल से सोवानदेव चट्टोपाध्याय शामिल होंगे।

कार्यक्रम को लेकर गुरुवार को कलेक्टर बालागुरू और एसपी दीपक कुमार शुक्ला ने आष्टा स्थित इंटरनेशनल सेंटर फॉर एग्रीकल्चर रिसर्च इन द ड्राई एरियाज (ICARDA) में जाकर कार्यक्रम स्थल का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने स्थल पर व्यवस्थाओं, यातायात प्रबंधन, बैठक व्यवस्था, सुरक्षा और अन्य तैयारियों की समीक्षा की।

सीहोर राज्य में मूंग और अन्य दालों के उत्पादन में अग्रणी है। यह जिला दलहन उत्पादन में चौथे स्थान पर है और मूंग उत्पादकता में भी उच्च स्थान रखता है। राष्ट्रीय सम्मेलन के माध्यम से सीहोर को देशभर में एक महत्वपूर्ण दलहन केंद्र के रूप में पहचाना जाएगा। सम्मेलन में तुअर, उड़द, मसूर जैसी प्रमुख दलहनी फसलों पर बीज, उत्पादन, प्रसंस्करण, भंडारण और विपणन से जुड़े मुद्दों पर विस्तृत चर्चा होगी। किसानों के हित में समयबद्ध खरीद और नई तकनीकों के प्रदर्शन से उत्पादन क्षमता बढ़ाने की रणनीति तैयार की जाएगी।

विधायक सुदेश राय ने बताया कि इस कार्यक्रम में प्रशासनिक भवन, किसान प्रशिक्षण केंद्र और उन्नत प्रयोगशालाओं का उद्घाटन भी किया जाएगा। खेतों में नई किस्मों और तकनीकों का प्रत्यक्ष प्रदर्शन होगा। इस राष्ट्रीय सम्मेलन से पूरे देश के किसानों को लाभ मिलेगा और सीहोर का नाम दलहन केंद्र के रूप में राष्ट्रीय स्तर पर उभरेगा।

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