NCERT विवाद: कक्षा 8 की किताब पर SC ने लगाया बैन, न्यायपालिका से जुड़े अध्याय पर कोर्ट ने जताई नाराजगी

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नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने एनसीईआरटी की कक्षा आठ की सामाजिक विज्ञान की पाठ्यपुस्तक में न्यायपालिका में भ्रष्टाचार से जुड़े अध्याय पर कड़ा रुख अपनाते हुए पुस्तक पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है। कोर्ट ने आदेश दिया कि बाजार में मौजूद सभी प्रतियां जब्त की जाएं और डिजिटल संस्करण को हटाकर इसे सार्वजनिक पहुंच से हटा दिया जाए। साथ ही, अध्याय तैयार करने वाली कमेटी के सदस्यों का विवरण और अध्याय फाइनल करने की बैठकों के मिनट्स भी कोर्ट को सौंपने को कहा गया है।

कोर्ट ने रिपोर्ट दाखिल करने के निर्देश दिए

सुप्रीम कोर्ट ने एनसीईआरटी के निदेशक और स्कूल शिक्षा सचिव को कारण बताओ नोटिस जारी कर पूछा कि क्यों न जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। दो सप्ताह में अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने के निर्देश के साथ मामले की अगली सुनवाई 11 मार्च को निर्धारित की गई है। कोर्ट ने मीडिया की सराहना करते हुए कहा कि यह मामला न्यायपालिका को कमजोर करने और उसकी गरिमा को ठेस पहुंचाने की सोची-समझी साजिश प्रतीत होता है।

सॉलिसिटर जनरल ने मांगी माफी

मामले की सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल ने बिना शर्त माफी मांगी। उन्होंने बताया कि एनसीईआरटी द्वारा बाजार में उपलब्ध 32 किताबें वापस मंगवाई जा चुकी हैं और पूरी पुस्तक की समीक्षा की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि एक और आपत्तिजनक अध्याय है जिसमें कहा गया कि “जस्टिस डिलेड, जस्टिस डिनाइड,” जो सत्यापित नहीं है।

चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने टिप्पणी की कि यह अध्याय न्यायपालिका की भूमिका को लोकतांत्रिक ताने-बाने के संदर्भ में नजरअंदाज करता है और छात्रों के बीच पक्षपातपूर्ण दृष्टिकोण पैदा करता है। उन्होंने कहा कि अध्याय का उद्देश्य न्यायपालिका की वैध आलोचना को दबाना नहीं है, बल्कि शिक्षा की गरिमा और छात्रों को उचित जानकारी देना है।

पीठ ने गंभीर चेतावनी दी

प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायाधीश जोयमाल्या बाग्ची और न्यायाधीश विपुल एम. पंचोली की पीठ ने केंद्र और राज्यों को आदेश का पालन सुनिश्चित करने और किसी भी उल्लंघन पर कड़ी कार्रवाई करने की चेतावनी दी। कोर्ट ने कहा कि यदि यह जानबूझकर किया गया कृत्य साबित होता है तो यह आपराधिक अवमानना के दायरे में आएगा और न्याय प्रशासन में बाधा उत्पन्न करेगा।

कोर्ट ने संकेत दिया कि अनुपालन रिपोर्ट और अन्य विवरणों की समीक्षा के बाद जिम्मेदारी तय करने के लिए एक पैनल का गठन भी किया जा सकता है।

 

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