मनरेगा की जगह नई रोजगार योजना लागू, अब मिलेगा 125 दिन काम और औसतन ₹327.4 प्रतिदिन मजदूरी

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नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने ग्रामीण रोजगार व्यवस्था में बड़ा बदलाव करते हुए ‘विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार और आजीविका मिशन ग्रामीण एक्ट’ को 1 जुलाई से लागू कर दिया है। इस नए कानून के लागू होने के साथ ही ‘महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी एक्ट’ की जगह नई व्यवस्था ने ले ली है। सरकार ने योजना के तहत शुरुआती आधार मजदूरी 300 रुपये प्रतिदिन निर्धारित की है। यह पहली बार है जब राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी कार्यक्रम में न्यूनतम मजदूरी सीमा तय की गई है।

सरकारी आंकड़ों के अनुसार नई योजना के तहत राष्ट्रीय औसत अधिसूचित मजदूरी को पहले की 298.8 रुपये प्रतिदिन से बढ़ाकर 327.4 रुपये प्रतिदिन कर दिया गया है। यह करीब 9.5 प्रतिशत की वृद्धि है। ग्रामीण विकास मंत्रालय ने बताया कि योजना के सुचारु क्रियान्वयन के लिए राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को मजदूरी भुगतान तथा अन्य प्रक्रियाओं के लिए 95,692.3 करोड़ रुपये का अंतरिम आवंटन जारी किया गया है।

सरकार ने इससे पहले मई महीने में स्पष्ट किया था कि 30 जून तक पूर्व योजना के तहत चल रहे सभी कार्य नए ढांचे में जारी रहेंगे। मंत्रालय के अनुसार, ई-केवाईसी सत्यापित पुराने जॉब कार्ड तब तक मान्य रहेंगे, जब तक लाभार्थियों को नए ‘ग्रामीण रोजगार गारंटी कार्ड’ जारी नहीं कर दिए जाते।

यह कानून 21 दिसंबर को राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के बाद प्रभावी हुआ। संसद में इसे विपक्षी दलों के विरोध के बीच पारित किया गया था। पूर्व व्यवस्था, जिसे वर्ष 2005 में शुरू किया गया था, ग्रामीण क्षेत्रों के इच्छुक परिवारों को हर साल 100 दिनों के अकुशल रोजगार की गारंटी प्रदान करती थी।

नई व्यवस्था में रोजगार के गारंटीकृत दिनों की संख्या बढ़ाकर 125 कर दी गई है। इसके साथ ही परियोजनाओं की लागत में राज्यों की हिस्सेदारी बढ़ाकर 40 प्रतिशत कर दी गई है। केंद्र सरकार मजदूरी का खर्च वहन करती रहेगी, जबकि सामग्री और प्रशासनिक खर्चों में राज्यों की भागीदारी बढ़ेगी।

हालांकि, इस कानून को लेकर आलोचनाएं भी सामने आई हैं। कई अर्थशास्त्रियों और श्रमिक अधिकार विशेषज्ञों का कहना है कि नई व्यवस्था में निर्णय लेने की अधिक शक्ति केंद्र सरकार के पास केंद्रित हो जाती है, जबकि राज्यों पर वित्तीय बोझ बढ़ सकता है।

उधर, विपक्ष शासित पांच राज्यों—कर्नाटक, केरल, पंजाब, तेलंगाना और झारखंड—ने इस कानून का विरोध करते हुए प्रस्ताव पारित किए हैं। इन राज्यों ने पुरानी रोजगार गारंटी योजना को दोबारा लागू करने की मांग उठाई है।

 

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