सरकारी कर्मचारियों के लिए नया नियम: माता-पिता का ख्याल नहीं रखा तो कटेगी 15% सैलरी, सीधे बुजुर्गों के खाते में जाएगी रकम
हैदराबाद : कलयुग के इस दौर में जहां आधुनिकता की चकाचौंध में अक्सर बूढ़े माता-पिता को उनके ही घर में बेगाना कर दिया जाता है, वहां तेलंगाना सरकार ने एक ‘श्रावण कुमार’ वाली भूमिका अपनाई है. मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने सोमवार को एक ऐसी घोषणा की, जिसने उन संतानों की नींद उड़ा दी है जो अपने माता-पिता को बेसहारा छोड़ देते हैं. अब गुहार और मिन्नतों का दौर खत्म हुआ क्योंकि सरकार ने सीधा प्रहार जेब पर किया है. यह महज एक प्रशासनिक आदेश नहीं बल्कि उन थकी हुई आंखों को इंसाफ दिलाने की कोशिश है जो उम्र के आखिरी पड़ाव पर अपनों का साथ तलाशती हैं. तेलंगाना की धरती से उठी यह गूंज अब पूरे देश के लिए एक नजीर बनने जा रही है.
बुजुर्गों की अनदेखी करने वाले सरकारी कर्मचारियों पर नकेल कसने के लिए तेलंगाना सरकार एक ऐतिहासिक और मानवीय फैसला लेने जा रही है। मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने स्पष्ट कर दिया है कि जो कर्मचारी अपने माता-पिता की देखभाल नहीं करेंगे, उनके वेतन से सीधे तौर पर कटौती की जाएगी। एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने इस प्रस्तावित कानून की रूपरेखा साझा की। उन्होंने कहा कि यह कदम समाज में बुजुर्गों के प्रति गिरती जिम्मेदारी और उनके सम्मान को बचाने के लिए उठाया जा रहा है।
तेलंगाना सरकार के नए फैसलों से जुड़े सवाल
1. क्या निजी क्षेत्र के कर्मचारियों पर भी यह 10% सैलरी वाला नियम लागू होगा?
फिलहाल यह घोषणा सरकारी कर्मचारियों के लिए की गई है. सरकार इसके लिए जल्द ही एक विस्तृत कानून (Act) लाने वाली है.
2. सैलरी कटवाने के लिए माता-पिता को कहाँ शिकायत करनी होगी?
इसके लिए सरकार एक विशेष शिकायत तंत्र विकसित कर रही है, जिसकी जानकारी कानून बनने के साथ साझा की जाएगी.
3. ‘प्रणाम’ केंद्र क्या हैं?
ये वरिष्ठ नागरिकों के लिए बनाए गए विशेष डे-केयर सेंटर हैं, जहाँ उनके मनोरंजन, स्वास्थ्य और सामाजिक मेलजोल का ध्यान रखा जाएगा.
4. ट्रांसजेंडर को-ऑप्शन सदस्य का क्या लाभ होगा?
इससे ट्रांसजेंडर समुदाय को स्थानीय शासन में अपनी आवाज उठाने और अपनी समस्याओं को सीधे सरकार तक पहुँचाने का मौका मिलेगा.
5. क्या दिव्यांगों के लिए रोजगार में कोई विशेष आरक्षण है?
हाँ, मुख्यमंत्री ने शिक्षा और रोजगार में दिव्यांगों के लिए विशेष कोटा प्रदान करने की प्रतिबद्धता दोहराई है.
वेतन से होगी 15% तक कटौती
मुख्यमंत्री के अनुसार, सरकार आगामी बजट सत्र में एक विशेष विधेयक (Bill) पेश करने की तैयारी में है। इस कानून के लागू होने के बाद:

जो कर्मचारी अपने माता-पिता की उपेक्षा करेंगे, उनके वेतन से 10 से 15 फीसदी की कटौती की जाएगी।
काटी गई यह राशि बिना किसी देरी के सीधे माता-पिता के बैंक खाते में हस्तांतरित (Transfer) कर दी जाएगी।
सीएम ने कड़े शब्दों में कहा, “जो लोग अपने जन्मदाताओं की देखभाल नहीं कर सकते, वे समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी कभी नहीं निभा पाएंगे।”
‘प्रणाम’ डे केयर सेंटर और सख्त कार्रवाई
सरकार केवल वेतन कटौती तक ही सीमित नहीं रहेगी। वरिष्ठ नागरिकों की सुरक्षा और सम्मान के लिए अन्य घोषणाएं भी की गईं:
प्रणाम सेंटर: बुजुर्गों के लिए ‘प्रणाम’ नाम से अत्याधुनिक डे केयर सेंटर बनाए जाएंगे।
त्वरित शिकायत निवारण: बुजुर्ग माता-पिता द्वारा अपने बच्चों के खिलाफ की गई शिकायतों पर त्वरित और कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
सम्मानजनक जीवन: सरकार का लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि राज्य का हर बुजुर्ग गरिमापूर्ण जीवन जी सके।
ट्रांसजेंडर समुदाय के लिए भी बड़ी घोषणा
सामाजिक न्याय की दिशा में कदम बढ़ाते हुए सीएम रेड्डी ने ट्रांसजेंडर समुदाय के लिए भी एक बड़ा ऐलान किया। उन्होंने घोषणा की कि आगामी स्थानीय निकाय चुनावों में प्रत्येक नगर निगम में ट्रांसजेंडर समुदाय के लिए एक सह-सदस्य पद आरक्षित किया जाएगा।