चेक बाउंस केस में नहीं मिली राहत, दिल्ली हाईकोर्ट ने राजपाल यादव मामले पर फैसला रखा सुरक्षित

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नई दिल्ली: बॉलीवुड अभिनेता और कॉमेडियन राजपाल यादव की मुश्किलें चेक बाउंस मामले में अब भी कम होती नजर नहीं आ रहीं। लंबे समय से चल रहे इस विवाद में गुरुवार को दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई हुई, लेकिन दोनों पक्षों के बीच किसी तरह का समझौता नहीं हो सका। इसके बाद अदालत ने मामले में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है।

15 साल पुराना है पूरा विवाद
यह मामला करीब डेढ़ दशक पुराना है, जो साल 2012 में रिलीज हुई फिल्म ‘अता पता लापता’ से जुड़ा है। इस फिल्म का निर्देशन खुद राजपाल यादव ने किया था। फिल्म के निर्माण के लिए मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड के जरिए लगभग 5 करोड़ रुपये का कर्ज लिया गया था, लेकिन फिल्म बॉक्स ऑफिस पर असफल रही, जिससे भारी आर्थिक नुकसान हुआ।

कर्ज चुकाने के लिए दिए चेक, कई हुए बाउंस
आर्थिक नुकसान के बाद राजपाल यादव ने कर्ज चुकाने के लिए करीब 7 चेक जारी किए, जिनमें से कई चेक बाउंस हो गए। इसके बाद मामला अदालत में पहुंचा और वर्ष 2018 में उन्हें चेक बाउंस से जुड़े प्रावधानों के तहत दोषी ठहराया गया।

जेल भी काट चुके हैं राजपाल यादव
अदालती आदेश के बाद इसी वर्ष फरवरी में राजपाल यादव को तिहाड़ जेल में सरेंडर करना पड़ा था। कुछ समय जेल में बिताने के बाद उन्हें जमानत मिल गई। जेल से बाहर आने के तुरंत बाद वह अपने गांव पहुंचे थे, जहां उन्होंने पारिवारिक कार्यक्रम में हिस्सा लिया।

समझौता न होने से अटका मामला
ताजा सुनवाई के दौरान अदालत ने दोनों पक्षों के बीच समझौते की संभावना तलाशने की कोशिश की, लेकिन सहमति नहीं बन सकी। ऐसे में हाईकोर्ट ने अब इस मामले में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। राजपाल यादव ने कहा है कि उन्हें अदालत के हर आदेश का पालन करना स्वीकार है।

फिल्मी करियर में फिर सक्रिय
कानूनी उलझनों के बीच राजपाल यादव एक बार फिर फिल्मी दुनिया में सक्रिय हो गए हैं। हाल ही में उन्होंने ‘भूत बंगला’ के सेट से अपनी तस्वीरें साझा की थीं, जिससे संकेत मिलते हैं कि वह नए प्रोजेक्ट्स पर काम कर रहे हैं।

 

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