नोएडा और ग्रेटर नोएडा के बीच लगातार बढ़ते ट्रैफिक दबाव को देखते हुए अब एक नए एक्सप्रेस-वे की योजना पर तेजी से काम शुरू हो गया है। यदि सरकार से इस प्रस्ताव को अंतिम मंजूरी मिल जाती है तो यह एक्सप्रेस-वे नोएडा और ग्रेटर नोएडा के लाखों लोगों के लिए बड़ी राहत साबित होगा। यह एक्सप्रेस-वे शहर के बीच से होकर गुजरेगा, जिससे रोजाना लगने वाले जाम से निजात मिलने की उम्मीद है।
मुख्यमंत्री को दी गई परियोजना की जानकारी
सूत्रों के मुताबिक हाल ही में नोएडा प्राधिकरण के अधिकारियों ने शासन स्तर पर नए एक्सप्रेस-वे का प्रस्ताव रखा था। इस दौरान मुख्यमंत्री को बताया गया कि मौजूदा सड़कों पर ट्रैफिक का दबाव तेजी से बढ़ रहा है और आने वाले वर्षों में स्थिति और गंभीर हो सकती है। मुख्यमंत्री से सकारात्मक संकेत मिलने के बाद प्रशासनिक स्तर पर इस परियोजना को आगे बढ़ाने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है।
यमुना पुश्ता रोड के समानांतर बनेगा एक्सप्रेस-वे
प्रस्तावित योजना के अनुसार यह नया एक्सप्रेस-वे यमुना पुश्ता रोड के समानांतर विकसित किया जाएगा। इसका मुख्य उद्देश्य नोएडा और ग्रेटर नोएडा के बीच यातायात के लिए एक वैकल्पिक और तेज मार्ग उपलब्ध कराना है। अधिकारियों का कहना है कि पुश्ता रोड के आसपास उपलब्ध सरकारी भूमि का उपयोग किया जाएगा, जिससे भूमि अधिग्रहण की समस्या काफी हद तक कम हो जाएगी।
30 किलोमीटर लंबा और 6 लेन का होगा मार्ग
नए ड्राफ्ट के मुताबिक एक्सप्रेस-वे की लंबाई करीब 30 किलोमीटर प्रस्तावित है। यह सेक्टर-94 से शुरू होकर ग्रेटर नोएडा के सेक्टर-150 तक जाएगा। एक्सप्रेस-वे को 6 लेन का बनाया जाएगा और डिजाइन इस तरह रखा जाएगा कि भविष्य में जरूरत पड़ने पर लेन बढ़ाई जा सके। अधिकारियों का कहना है कि नए ड्राफ्ट में पहले सामने आई तकनीकी कमियों को दूर कर दिया गया है।
बाढ़ के खतरे को देखते हुए बदली गई योजना
पहले प्रस्ताव पर सिंचाई विभाग ने आपत्ति जताई थी। विभाग का कहना था कि यदि एक्सप्रेस-वे जमीन के स्तर पर बनाया गया तो बाढ़ की स्थिति में यमुना का पानी शहर की ओर आ सकता है। इसी वजह से अब योजना में बदलाव करते हुए पुश्ता रोड के किनारे सुरक्षित डिजाइन पर काम किया जा रहा है।
मौजूदा सड़कों को मिलेगा बेहतर नेटवर्क
अधिकारियों के अनुसार कुछ हिस्सों में पहले से चार लेन और दो लेन की सड़कें मौजूद हैं, जबकि कई स्थानों पर खड़ंजा और कच्ची सड़कें हैं। नए एक्सप्रेस-वे के निर्माण से इन सभी हिस्सों को एक सुव्यवस्थित और आधुनिक रोड नेटवर्क से जोड़ा जाएगा। इससे ट्रैफिक सुगम होने के साथ-साथ क्षेत्र का समग्र विकास भी होगा।
पीपीपी मॉडल पर बनने की संभावना
नोएडा प्राधिकरण के सीईओ लोकेश एम. ने स्पष्ट किया है कि इतनी बड़ी परियोजना को अकेले वहन करना प्राधिकरण के लिए संभव नहीं है। ऐसे में इस एक्सप्रेस-वे को पीपीपी यानी पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप मॉडल पर विकसित किया जा सकता है। इससे निजी कंपनियों की भागीदारी के जरिए निर्माण कार्य तेजी से पूरा होगा और सरकारी खजाने पर अतिरिक्त बोझ भी नहीं पड़ेगा।
सफर होगा आसान, कनेक्टिविटी मजबूत
नया एक्सप्रेस-वे बनने के बाद नोएडा और ग्रेटर नोएडा के बीच यात्रा का समय काफी कम हो जाएगा। सेक्टर-94, सेक्टर-135, सेक्टर-150 और आसपास के इलाकों को इसका सीधा लाभ मिलेगा। इसके साथ ही यमुना एक्सप्रेस-वे और अन्य प्रमुख मार्गों से कनेक्टिविटी और बेहतर होगी।
विकास और निवेश को मिलेगा बढ़ावा
इस परियोजना से न केवल आम लोगों को ट्रैफिक से राहत मिलेगी, बल्कि रियल एस्टेट, औद्योगिक और व्यावसायिक गतिविधियों को भी गति मिलेगी। नोएडा और ग्रेटर नोएडा के कई सेक्टरों में निवेश की संभावनाएं और मजबूत होने की उम्मीद है।
फिलहाल परियोजना का नया प्रस्ताव और ड्राफ्ट तैयार कर लिया गया है। अब इसे अंतिम मंजूरी के लिए शासन के सामने रखा जाएगा। मंजूरी मिलते ही डीपीआर तैयार कर निर्माण प्रक्रिया शुरू की जाएगी। नोएडा-ग्रेटर नोएडा के बीच प्रस्तावित यह नया एक्सप्रेस-वे आने वाले वर्षों में पूरे क्षेत्र की तस्वीर बदल सकता है।