नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट बनेगा यात्रियों की पहली पसंद, 22 जिलों को सीधा फायदा; IGI का दबाव होगा कम

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ग्रेटर नोएडा में बन रहा नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट आने वाले समय में उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और राजस्थान के 22 जिलों के यात्रियों के लिए प्रमुख विकल्प बनकर उभरने वाला है। एशिया के सबसे बड़े एयरपोर्ट्स में शामिल यह परियोजना दिल्ली के इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर बढ़ते दबाव को कम करने में अहम भूमिका निभाएगी। शुरुआती अनुमान के मुताबिक, IGI से करीब 30 प्रतिशत यात्री नोएडा एयरपोर्ट की ओर शिफ्ट हो सकते हैं।

22 जिलों के यात्रियों के लिए बेहतर विकल्प
नोएडा एयरपोर्ट की व्यावहारिकता रिपोर्ट में पश्चिमी उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और राजस्थान के 22 जिलों को शामिल किया गया है। इन क्षेत्रों के यात्रियों के लिए यह एयरपोर्ट दूरी, सुविधा और लागत के लिहाज से ज्यादा उपयुक्त माना जा रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, इन जिलों से बड़ी संख्या में यात्री और कार्गो सीधे तौर पर इस एयरपोर्ट से लाभान्वित होंगे।

कम वैट से सस्ती हो सकती हैं टिकटें
एयरलाइंस के लिए सबसे बड़ा आकर्षण जेट ईंधन पर लगने वाला कम टैक्स है। जहां दिल्ली में एविएशन टर्बाइन फ्यूल पर 25 प्रतिशत वैट लगता है, वहीं नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर यह महज 1 प्रतिशत है। ऐसे में ऑपरेशन लागत घटने से टिकट कीमतों में कमी आने की संभावना है, जिससे एयरलाइंस और यात्रियों दोनों का रुझान तेजी से इस ओर बढ़ सकता है।

IGI एयरपोर्ट पर कम होगा दबाव
दिल्ली का इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट देश के सबसे व्यस्त एयरपोर्ट्स में शामिल है, जहां हर साल 7 से 8 करोड़ यात्री सफर करते हैं। लगातार बढ़ती भीड़ और सीमित जमीन के कारण यहां विस्तार की संभावनाएं सीमित हैं। ऐसे में नोएडा एयरपोर्ट के शुरू होने से यात्रियों को राहत मिलने की उम्मीद है और भीड़ का दबाव कम होगा।

कार्गो हब के रूप में भी मजबूत भूमिका
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को बड़े कार्गो हब के रूप में विकसित किया जा रहा है। इसकी शुरुआती क्षमता 2.5 लाख मीट्रिक टन है, जो आगे बढ़कर 18 लाख मीट्रिक टन तक पहुंचने का अनुमान है। मौजूदा समय में IGI एयरपोर्ट की कार्गो क्षमता 1.8 लाख मीट्रिक टन है, जिससे स्पष्ट है कि भविष्य में कार्गो ट्रैफिक का बड़ा हिस्सा नोएडा की ओर शिफ्ट हो सकता है।

बेहतर कनेक्टिविटी बनेगी सबसे बड़ी ताकत
नोएडा एयरपोर्ट की सबसे बड़ी खासियत इसकी कनेक्टिविटी होगी। यह यमुना एक्सप्रेसवे, ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे, दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे, प्रस्तावित हाई-स्पीड रेल और मेट्रो नेटवर्क से जुड़ा होगा। इससे दिल्ली, नोएडा, आगरा, अलीगढ़, मथुरा और मेरठ जैसे शहरों से सीधा संपर्क संभव होगा।

करीब 7 करोड़ आबादी को सीधा फायदा
इस एयरपोर्ट से दिल्ली-एनसीआर, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, हरियाणा, मध्य प्रदेश के ग्वालियर और मुरैना तथा राजस्थान के धौलपुर और भरतपुर समेत करीब 7 करोड़ लोगों को सीधा लाभ मिलने का अनुमान है। खासकर पश्चिमी यूपी के लोगों को अब फ्लाइट पकड़ने के लिए दिल्ली जाने की जरूरत काफी हद तक कम हो जाएगी।

दिल्ली-एनसीआर बना डुअल एयरपोर्ट रीजन
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के शुरू होने के साथ ही दिल्ली-एनसीआर भी देश के उन क्षेत्रों में शामिल हो जाएगा जहां दो इंटरनेशनल एयरपोर्ट संचालित होंगे। इससे पहले मुंबई इस श्रेणी में शामिल हो चुका है, जहां दो बड़े एयरपोर्ट संचालित हैं।

आधुनिक सुविधाओं से लैस होगा एयरपोर्ट
करीब 11,742.45 एकड़ में फैले इस एयरपोर्ट में 3,900 मीटर लंबा रनवे होगा, जो कम दृश्यता में भी संचालन में सक्षम रहेगा। एयरपोर्ट पर इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम, आधुनिक लाइटिंग और 24 घंटे संचालन की सुविधा होगी। वाइड-बॉडी विमानों के संचालन के साथ-साथ यहां डिजिटल चेक-इन और सेल्फ सर्विस कियोस्क की सुविधा दी जाएगी, जिससे यात्रियों का समय बचेगा।

तेजी से बढ़ेगी यात्री क्षमता
रेटिंग एजेंसी के मुताबिक, देश में विकसित हो रहे नए एयरपोर्ट्स के साथ यह एयरपोर्ट भी इस साल के अंत तक बड़ी संख्या में यात्रियों को संभालने की क्षमता हासिल कर लेगा। आने वाले वर्षों में इसकी यात्री क्षमता लगातार बढ़ाई जाएगी, जिससे यह एक प्रमुख वैश्विक एविएशन हब के रूप में स्थापित हो सके।

 

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