महाराष्ट्र के रत्नागिरी जिले में स्थित दाऊद इब्राहिम की पुश्तैनी चार कृषि भूमि आखिरकार नीलाम हो गई हैं। सरकारी सूत्रों के अनुसार, मुंबई का एक शख्स सबसे अधिक बोली लगाकर इन चारों संपत्तियों का अधिकार हासिल करने में सफल रहा है। ये जमीनें मुंबक गांव में हैं, जिसे दाऊद के परिवार का पैतृक गांव माना जाता है। अधिकारियों ने बताया कि इनमें से कुछ प्लॉट पहले उसकी मां अमीना बी के नाम पर दर्ज थीं।
नीलामी का कानूनी ढांचा और प्रक्रिया
केंद्र सरकार की ओर से यह नीलामी 5 मार्च 2026 को स्मगलर्स एंड फॉरेन एक्सचेंज मैनिपुलेटर्स (प्रॉपर्टी जब्ती) अधिनियम के तहत आयोजित की गई थी। नियमों के अनुसार, सबसे ऊंची बोली लगाने वाले को अप्रैल 2026 की शुरुआत तक पूरी राशि जमा करनी होगी। उसके बाद संबंधित प्राधिकरण की अंतिम मंजूरी मिलने पर संपत्ति का हस्तांतरण किया जाएगा।
खरीदारों की हिचकिचाहट और पिछली नीलामी
इन संपत्तियों की बिक्री की कोशिशें कई सालों से चल रही थीं, लेकिन कई बार प्रक्रिया अधूरी रह गई या कोई खरीदार सामने नहीं आया। नवंबर 2025 में संपत्तियों की आरक्षित कीमत करीब 30 प्रतिशत कम की गई थी, फिर भी कोई बोलीदाता सामने नहीं आया। विशेषज्ञों का कहना है कि दाऊद और उसकी डी-कंपनी से जुड़ा नाम संभावित खरीदारों को रोकने की बड़ी वजह रही। इसके अलावा, जमीनें ग्रामीण इलाके में होने और मुख्य रूप से कृषि उपयोग के लिए उपयुक्त होने के कारण तत्काल आर्थिक लाभ की संभावना भी सीमित थी।
नीलामी में बोली की जानकारी
चारों जमीनों में सबसे ज्यादा चर्चा सर्वे नंबर 442 (भाग 13-बी) की रही। इसकी आरक्षित कीमत लगभग 9.41 लाख रुपये थी, लेकिन इस पर 10 लाख रुपये से अधिक की बोली लगी। इस प्लॉट के लिए मुंबई और रत्नागिरी से दो बोलीदाता सामने आए। बाकी तीन जमीनों पर केवल एक-एक बोलीदाता ने बोली लगाई और सभी आवश्यक शर्तें पूरी करते हुए उन्हें खरीदा।