‘भारत-पाकिस्तान समेत कई मोर्चों पर टला परमाणु युद्ध’, डोनाल्ड ट्रंप का बड़ा दावा, न्यू स्टार्ट संधि पर भी उठाए सवाल
न्यूयॉर्क। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय मंच पर बड़ा दावा करते हुए कहा है कि उन्होंने भारत और पाकिस्तान समेत दुनिया के कई देशों के बीच संभावित परमाणु युद्ध को रोका है। इसके साथ ही ट्रंप ने परमाणु हथियार नियंत्रण से जुड़ी न्यू स्टार्ट संधि की कड़ी आलोचना करते हुए इसे अव्यवहारिक बताया और एक नई, आधुनिक संधि की जरूरत पर जोर दिया है।
ट्रुथ सोशल पर किया बड़ा दावा, नहीं दिए सबूत
डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर पोस्ट करते हुए कहा कि उन्होंने पाकिस्तान और भारत, ईरान और इजरायल, तथा रूस और यूक्रेन के बीच परमाणु युद्ध की स्थिति बनने से पहले ही उसे टाल दिया। हालांकि, अपने इस दावे के समर्थन में ट्रंप ने किसी तरह का ठोस विवरण या प्रमाण साझा नहीं किया।
परमाणु हथियारों से लैस सेना का किया जिक्र
ट्रंप ने पोस्ट में कहा कि अमेरिका दुनिया का सबसे शक्तिशाली देश है और उनके पहले कार्यकाल में अमेरिकी सेना का पूरी तरह से पुनर्निर्माण किया गया। उन्होंने दावा किया कि इस दौरान कई नए और मरम्मत किए गए परमाणु हथियार सेना में शामिल किए गए। इसके साथ ही स्पेस फोर्स की स्थापना को भी उन्होंने अपनी उपलब्धियों में गिनाया।
दूसरे विश्व युद्ध से भी ज्यादा ताकतवर युद्धपोतों का दावा
अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि अब अमेरिकी सेना को ऐसे स्तर पर दोबारा तैयार किया जा रहा है, जैसा पहले कभी नहीं देखा गया। उन्होंने दावा किया कि अमेरिका ऐसे अत्याधुनिक युद्धपोत भी शामिल कर रहा है, जो दूसरे विश्व युद्ध के दौरान इस्तेमाल हुए आयोवा, मिसौरी और अलबामा जैसे जहाजों से कई गुना अधिक शक्तिशाली होंगे।
भारत-पाकिस्तान सहित कई देशों के बीच टकराव टालने का दावा
ट्रंप ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि उन्होंने वैश्विक स्तर पर कई बड़े परमाणु टकरावों को रोका है। उनके मुताबिक, भारत-पाकिस्तान, ईरान-इजरायल और रूस-यूक्रेन के बीच हालात ऐसे बन सकते थे, जो परमाणु युद्ध की ओर बढ़ते, लेकिन उन्हें समय रहते रोका गया।
न्यू स्टार्ट संधि पर सवाल, नई डील की वकालत
डोनाल्ड ट्रंप ने न्यू स्टार्ट परमाणु हथियार नियंत्रण संधि को ‘खराब तरीके से की गई डील’ बताया। उन्होंने कहा कि इस समझौते का गंभीर उल्लंघन हो रहा है, ऐसे में इसे आगे बढ़ाने के बजाय परमाणु विशेषज्ञों को एक नई, बेहतर और आधुनिक संधि पर काम करना चाहिए, जो भविष्य में लंबे समय तक प्रभावी रह सके।