ईस्टर के मौके पर रूस-यूक्रेन युद्ध में अस्थायी विराम पर सहमति, पुतिन ने घोषित किया सीजफायर; जेलेंस्की बोले- शांति की दिशा में वास्तविक प्रगति जरूरी

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नई दिल्ली: रूस-यूक्रेन युद्ध को लेकर बड़ा घटनाक्रम सामने आया है, जहां रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने ऑर्थोडॉक्स ईस्टर के अवसर पर यूक्रेन में अस्थायी युद्धविराम की घोषणा की है। इस कदम के बाद यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने भी युद्धविराम का पालन करने की बात कही है। यह अस्थायी सीजफायर 11 अप्रैल 2026 की शाम 4 बजे (मॉस्को समयानुसार) से शुरू होकर 12 अप्रैल 2026 के अंत तक लागू रहेगा।

सीजफायर की समयसीमा और निर्देश

क्रेमलिन के अनुसार, यह निर्णय ऑर्थोडॉक्स ईस्टर से पहले लिया गया है। आदेश के तहत रूसी सेना को सभी मोर्चों पर सैन्य कार्रवाई रोकने के निर्देश दिए गए हैं। हालांकि, साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि किसी भी संभावित हमले या उकसावे की स्थिति में जवाब देने के लिए सेना को तैयार रहना होगा। रक्षा मंत्रालय और सेना के शीर्ष अधिकारियों को इस अवधि में युद्धक गतिविधियां रोकने का निर्देश दिया गया है।

जेलेंस्की ने कहा- पहले भी दिया था युद्धविराम का प्रस्ताव

यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने कहा कि उनका देश पहले ही ईस्टर अवधि के लिए युद्धविराम का प्रस्ताव दे चुका है और उसी के अनुसार आगे भी कदम उठाया जाएगा। उन्होंने कहा कि यूक्रेन सममित कार्रवाई के लिए तैयार है। उन्होंने यह भी कहा कि लोगों को सुरक्षित ईस्टर और शांति की दिशा में वास्तविक प्रगति की जरूरत है। जेलेंस्की ने यह संकेत दिया कि यदि रूस युद्धविराम का पालन करता है तो आगे भी इसे बढ़ाने की संभावना बन सकती है।

शांति वार्ता ठप, लेकिन अस्थायी राहत का प्रयास

यह अस्थायी युद्धविराम ऐसे समय पर आया है जब दोनों देशों के बीच शांति वार्ता लंबे समय से ठप पड़ी हुई है। इससे पहले रूस की ओर से यह भी कहा गया था कि युद्ध समाप्त करने के लिए यूक्रेन को डोनबास क्षेत्र से अपने सैनिकों की वापसी करनी होगी। रूस का कहना है कि राजनीतिक और कूटनीतिक समाधान की दिशा में आगे बढ़ने के लिए यह कदम आवश्यक है।

तनाव के बीच राहत की छोटी उम्मीद

विशेषज्ञों का मानना है कि यह अस्थायी सीजफायर भले ही सीमित अवधि का हो, लेकिन युद्ध के बीच एक राहत का संकेत जरूर है। हालांकि दोनों पक्षों के बीच गहरे मतभेद अब भी बने हुए हैं, जिससे स्थायी शांति समझौते की राह आसान नहीं दिख रही।

 

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