Pariksha Pe Charcha 2026: दूसरे एपिसोड में पीएम मोदी का छात्रों को मंत्र, बोले- अनुशासन, तकनीक और सोच से बनेगा भविष्य
Pariksha Pe Charcha 2026 का दूसरा एपिसोड रविवार, 9 फरवरी को सुबह 10 बजे संपन्न हुआ। इस संवादात्मक सत्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशभर के छात्रों से सीधे बातचीत की और परीक्षा, जीवन, करियर, अनुशासन, आर्ट, टेक्नोलॉजी और स्टार्टअप से जुड़े कई अहम मुद्दों पर खुलकर मार्गदर्शन दिया। यह कार्यक्रम प्रधानमंत्री के आधिकारिक यूट्यूब चैनल, दूरदर्शन और शिक्षा मंत्रालय के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर लाइव प्रसारित किया गया।
देश के चार राज्यों से जुड़े ExamWarriors, बोर्ड और प्रतियोगी परीक्षाओं पर फोकस
दूसरे एपिसोड में गुजरात के देवमोगरा, तमिलनाडु के कोयंबटूर, छत्तीसगढ़ के रायपुर और असम के गुवाहाटी से जुड़े ExamWarriors ने हिस्सा लिया। पीएम मोदी ने बोर्ड और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी, मानसिक दबाव को संभालने और चुनौतियों से निपटने के तरीकों पर छात्रों को व्यावहारिक सलाह दी।
‘मेरे लिए यह सीखने का मंच है, सिखाने का नहीं’
कार्यक्रम की शुरुआत में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि Pariksha Pe Charcha उनके लिए एक सीखने का कार्यक्रम होता है। उन्होंने कहा कि वह छात्रों को सुनना चाहते हैं और उनके अनुभवों से खुद भी सीखते हैं।
स्टार्टअप को लेकर पीएम मोदी का स्पष्ट संदेश
एक छात्रा के सवाल पर पीएम मोदी ने कहा कि स्टार्टअप शुरू करने के लिए उम्र की कोई सीमा नहीं होती। उन्होंने कहा कि सबसे पहले यह तय करना जरूरी है कि व्यक्ति क्या करना चाहता है। 25 साल की उम्र की कोई बाध्यता नहीं है और छोटे स्तर से भी स्टार्टअप की शुरुआत की जा सकती है।
विकसित भारत के लिए आदतों में बदलाव जरूरी
विकसित भारत से जुड़े सवाल पर प्रधानमंत्री ने कहा कि अगर देश को विकसित बनाना है तो नागरिकों को भी अपनी आदतें विकसित देशों जैसी बनानी होंगी। उन्होंने जोर दिया कि छोटी-छोटी जिम्मेदारियां निभाकर हर नागरिक विकसित भारत के निर्माण में योगदान दे सकता है।
‘पढ़ाई और आर्ट को अलग-अलग न देखें’
रेगुलर पढ़ाई के साथ आर्ट और क्राफ्ट को संतुलित करने पर पीएम मोदी ने कहा कि छात्रों को पढ़ाई और कला को अलग-अलग नहीं देखना चाहिए। उन्होंने उदाहरण देते हुए समझाया कि साइंस पढ़ते समय आर्ट का उपयोग कर कॉन्सेप्ट को और बेहतर तरीके से समझा जा सकता है। साथ ही उन्होंने सलाह दी कि रोजाना या सप्ताह में कुछ समय आर्ट के लिए निकालने से पढ़ाई का तनाव कम होता है।
अनुशासन को बताया सफलता की बुनियाद
अनुशासन से जुड़े सवाल पर पीएम मोदी ने कहा कि जीवन में अनुशासन बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि इंस्पिरेशन तभी सार्थक होता है जब उसके साथ अनुशासन जुड़ा हो, अन्यथा प्रेरणा भी बोझ बन सकती है।
AI और टेक्नोलॉजी से डरने की जरूरत नहीं
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर पूछे गए सवाल के जवाब में प्रधानमंत्री ने कहा कि किसी भी तकनीक से डरना नहीं चाहिए। उन्होंने कहा कि कोशिश यह होनी चाहिए कि इंसान टेक्नोलॉजी का गुलाम न बने, बल्कि उसे समझकर अपने विकास के लिए इस्तेमाल करे।
‘भारत की विविधता देखने के लिए एक जिंदगी कम है’
छत्तीसगढ़ के एक छात्र के सवाल पर पीएम मोदी ने कहा कि यात्रा करते समय व्यक्ति को छात्र की तरह जिज्ञासु बनकर जाना चाहिए। उन्होंने भारत की विविधता का जिक्र करते हुए कहा कि देश इतना विशाल और रंग-बिरंगा है कि इसे देखने के लिए एक जिंदगी भी कम पड़ सकती है।
शिक्षा और हुनर दोनों जरूरी
एक छात्रा के सवाल पर पीएम मोदी ने स्पष्ट किया कि शिक्षा जीवन और समाज दोनों के लिए जरूरी है। उन्होंने कहा कि खेल या किसी हुनर में अच्छा होना पढ़ाई को नजरअंदाज करने का कारण नहीं बनना चाहिए। साथ ही केवल शिक्षा को ही सबकुछ मानना भी सही नहीं है, हुनर का विकास भी उतना ही जरूरी है।
लीडरशिप की शुरुआत खुद से करें
प्रधानमंत्री ने छात्रों को सलाह दी कि वे खुद को हमेशा लीडर के रूप में तैयार करें। उन्होंने कहा कि जब मन में यह सोच आ जाती है कि कोई करे या न करे, मैं करूंगा, तो वहीं से नेतृत्व की शुरुआत होती है।
शिक्षा पर जोर से तेज होगा विकास
गुजरात के एक छात्र के सवाल पर पीएम मोदी ने कहा कि देश जितना ज्यादा शिक्षा पर बल देगा, उतनी ही तेजी से विकास करेगा।
शिक्षक की भूमिका पर पीएम मोदी का संदेश
शिक्षक को लेकर पूछे गए सवाल पर प्रधानमंत्री ने कहा कि हर व्यक्ति के जीवन में शिक्षक की भूमिका बेहद अहम होती है। इस दौरान छात्रों ने पीएम मोदी को गीत भी सुनाया।
कंपेरिजन से बचने की सलाह, माता-पिता को दिया संदेश
तुलना से जुड़े सवाल पर पीएम मोदी ने कहा कि छात्रों को तनाव कम करने के लिए सुबह जल्दी उठना, सूर्योदय देखना और गहरी सांस लेने का अभ्यास करना चाहिए। उन्होंने माता-पिता से अपील की कि बच्चों की तुलना न तो भाई-बहनों से करें और न ही जरूरत से ज्यादा तारीफ या आलोचना करें। उन्होंने कहा कि कंपेरिजन से बचना बेहद जरूरी है और परिवार में किसी अनुभवी व्यक्ति को मन ही मन गुरु मानना भी लाभकारी होता है।