नई दिल्ली। महिलाओं में पीरियड्स के दौरान पेट में दर्द होना आम है, जिसे मेस्ट्रुअल क्रैम्प्स कहा जाता है। अक्सर पीरियड्स के शुरुआती दिनों में यह हल्का से मध्यम दर्द सामान्य माना जाता है। लेकिन कब यह दर्द सामान्य नहीं होता और कब डॉक्टर से जांच करानी चाहिए, इस बारे में जानकारी होना बेहद जरूरी है।
पीरियड्स में क्रैम्प्स होना कितना सामान्य है?
पीरियड्स के पहले 1-2 दिन पेट के निचले हिस्से, कमर या जांघों में हल्का से मध्यम दर्द होना सामान्य है। यह दर्द तब होता है जब यूटेरस अपनी अंदरूनी परत को बाहर निकालने के लिए सिकुड़ता है, जिससे मांसपेशियों में खिंचाव महसूस होता है। आमतौर पर यह दर्द हल्का होता है और आराम करने, हॉट वाटर बैग लगाने, हल्का व्यायाम करने या डॉक्टर की सलाह से साधारण पेनकिलर लेने से नियंत्रित किया जा सकता है। कुछ महिलाओं को इस दौरान हल्का सिरदर्द, थकान या जी मिचलाना भी महसूस हो सकता है, जो सामान्य ही माना जाता है।
कब दर्द सामान्य नहीं रहता?
यदि पीरियड पेन इतना गंभीर हो जाए कि आपका रोज़मर्रा का काम प्रभावित हो, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। अगर आप स्कूल, कॉलेज या ऑफिस नहीं जा पा रही हैं और साधारण पेनकिलर से राहत नहीं मिल रही, तो यह किसी गंभीर समस्या का संकेत हो सकता है।
इन संकेतों पर ध्यान दें:
- दर्द 2-3 दिनों से अधिक समय तक बना रहता है।
- दर्द अचानक पहले की तुलना में बहुत बढ़ गया हो।
- पीरियड शुरू होने के काफी दिन पहले ही क्रैम्प्स शुरू हो जाए।
डॉक्टर से कब सलाह लें?
दर्द के अलावा यदि ज्यादा ब्लीडिंग हो, पीरियड्स अनियमित हों या सेक्स के दौरान दर्द हो, तो तुरंत मेडिकल जांच जरूरी है। ये लक्षण एंडोमेट्रियोसिस, फाइब्रॉएड या किसी इन्फेक्शन की ओर इशारा कर सकते हैं। समय पर डॉक्टर से मिलकर जांच करवाने से किसी गंभीर समस्या का पता जल्दी चल सकता है और उचित इलाज शुरू किया जा सकता है।