दिल्ली में पीएम मोदी और तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय की मुलाकात, मेकेदातु विवाद के बीच बढ़ी सियासी हलचल
नई दिल्ली: तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय ने बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात कर राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं को तेज कर दिया। मुख्यमंत्री बनने के बाद प्रधानमंत्री मोदी के साथ यह उनकी पहली आधिकारिक मुलाकात रही। वहीं करीब 12 साल बाद दोनों नेताओं की आमने-सामने बैठक को दक्षिण भारतीय राजनीति के लिहाज से भी काफी अहम माना जा रहा है।
प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से इस मुलाकात की जानकारी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा की गई। पीएमओ ने बताया कि तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय ने नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से शिष्टाचार भेंट की।
मेकेदातु परियोजना पर चर्चा की अटकलें तेज
यह मुलाकात ऐसे समय हुई है जब कर्नाटक और तमिलनाडु के बीच मेकेदातु परियोजना को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। हाल ही में मुख्यमंत्री विजय ने प्रधानमंत्री मोदी को पत्र लिखकर कर्नाटक सरकार के मेकेदातु बांध प्रस्ताव को खारिज करने की मांग की थी।
तमिलनाडु सरकार का कहना है कि यदि कर्नाटक में यह परियोजना लागू होती है तो कावेरी नदी के जल बंटवारे पर असर पड़ेगा और राज्य के किसानों के हिस्से का पानी प्रभावित हो सकता है। मुख्यमंत्री विजय ने इसे किसानों के हितों से जुड़ा बड़ा मुद्दा बताया है।
दरअसल मेकेदातु परियोजना कर्नाटक सरकार की कावेरी नदी पर प्रस्तावित बहुउद्देशीय योजना है, जिसका उद्देश्य पेयजल आपूर्ति और जलविद्युत उत्पादन बताया जा रहा है। हालांकि तमिलनाडु लंबे समय से इस परियोजना का विरोध करता आ रहा है।
12 साल बाद फिर आमने-सामने आए मोदी और विजय
राजनीतिक सूत्रों के अनुसार विजय और प्रधानमंत्री मोदी की पिछली मुलाकात वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान कोयंबटूर में हुई थी। उस समय विजय सक्रिय राजनीति में नहीं थे और दक्षिण भारतीय फिल्म उद्योग के बड़े सितारे के तौर पर पहचान रखते थे।
अब मुख्यमंत्री बनने के बाद विजय का प्रधानमंत्री से मिलना तमिलनाडु की राजनीति में नए समीकरणों के संकेत के रूप में भी देखा जा रहा है।
फिल्मी दुनिया से सत्ता तक विजय का सफर चर्चा में
अभिनेता से राजनेता बने विजय ने बेहद कम समय में तमिलनाडु की राजनीति में अपनी मजबूत पहचान बनाई है। दशकों से डीएमके और एआईएडीएमके के बीच सिमटी राजनीति में विजय ने अपनी पार्टी टीवीके के जरिए नई राजनीतिक चुनौती खड़ी की।
हालांकि राजनीति में उनका सफर विवादों से भी घिरा रहा। एक रैली के दौरान हुई भगदड़ को लेकर विपक्ष ने उन पर गंभीर सवाल उठाए थे और पार्टी नेताओं की गिरफ्तारी भी हुई थी। इसके बावजूद विजय लगातार जनसंपर्क और जन मुद्दों के जरिए अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत करते रहे।
बाद में टीवीके ने अकेले चुनाव मैदान में उतरने का फैसला किया और पहले ही चुनाव में 108 सीटें जीतकर सबको चौंका दिया। इसके बाद कांग्रेस के समर्थन और राजनीतिक घटनाक्रमों के बीच विजय तमिलनाडु के मुख्यमंत्री पद तक पहुंचने में सफल रहे।