AI समिट में विरोध पर सियासी संग्राम, भाजपा ने कांग्रेस को घेरा

अमित मालवीय और मनजिंदर सिंह सिरसा ने प्रदर्शन को बताया ‘राष्ट्रीय कलंक’, कांग्रेस पर देश की छवि धूमिल करने का आरोप

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New Delhi में आयोजित India AI Impact Summit के दौरान शुक्रवार को उस समय हंगामा हो गया जब युवा कांग्रेस के कुछ कार्यकर्ताओं ने कार्यक्रम स्थल के बाहर और एक हॉल के निकट विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने कथित तौर पर शर्ट उतारकर केंद्र सरकार के खिलाफ नारे लगाए और अमेरिका के साथ हुए व्यापार समझौते पर आपत्ति जताई।

सुरक्षा कर्मियों ने तुरंत हस्तक्षेप करते हुए स्थिति को नियंत्रित किया और समिट की कार्यवाही को सुचारु रूप से जारी रखने के प्रयास किए। अधिकारियों के अनुसार, कार्यक्रम की सुरक्षा व्यवस्था कड़ी थी और किसी बड़े व्यवधान की सूचना नहीं है। वहीं प्रदर्शनकारियों का कहना है कि उनका विरोध सरकार की नीतियों के खिलाफ प्रतीकात्मक प्रदर्शन था।

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, सुबह के सत्र के दौरान अचानक कुछ प्रदर्शनकारी अपनी सीटों से खड़े हो गए और जोरदार नारेबाजी शुरू कर दी, जिससे सभागार में क्षणिक अव्यवस्था की स्थिति बन गई। उनकी आवाज़ से प्रतिनिधियों और अधिकारियों का ध्यान मंच से हटकर प्रदर्शन की ओर चला गया। सुरक्षा कर्मियों ने तत्काल हस्तक्षेप करते हुए प्रदर्शनकारियों को शांत कराने और कार्यक्रम की कार्यवाही को बाधित होने से बचाने की कोशिश की। कुछ ही देर में हालात काबू में ले लिए गए और सत्र निर्धारित एजेंडा के अनुसार आगे बढ़ा।

पांच दिवसीय शिखर सम्मेलन के अंतिम दिन हुए इस विरोध ने आयोजन की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए। कार्यक्रम में दुनिया भर के नेता और प्रौद्योगिकी विशेषज्ञ कृत्रिम बुद्धिमत्ता के भविष्य पर मंथन करने के लिए एकत्रित हुए थे, ऐसे में अचानक हुए प्रदर्शन ने कुछ समय के लिए माहौल तनावपूर्ण बना दिया।दिल्ली पुलिस के अनुसार, घटना को लेकर कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है और करीब 10 लोगों को हिरासत में लिया गया है। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि प्रदर्शन में शामिल लोगों के पास वैध प्रवेश पास था या नहीं। अधिकारियों का कहना है कि जांच के बाद ही आगे की कार्रवाई तय की जाएगी, जबकि सम्मेलन की शेष गतिविधियां सुरक्षा के बीच सामान्य रूप से संपन्न कराई गईं।

इंटरनेट पर कांग्रेस की आलोचना

घटना के बाद सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आईं। कई इंटरनेट यूजर्स ने इसे अंतरराष्ट्रीय मंच पर अनुचित प्रदर्शन बताते हुए कड़ी आलोचना की और कहा कि ऐसे कदमों से देश की छवि प्रभावित हो सकती है। कुछ लोगों ने संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग भी उठाई। वहीं, दूसरी ओर कुछ यूजर्स ने इसे लोकतांत्रिक व्यवस्था में विरोध के अधिकार के रूप में देखा। फिलहाल ऑनलाइन बहस तेज है और मामला राजनीतिक व सार्वजनिक विमर्श का हिस्सा बन गया है।

घटना पर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर तीखी टिप्पणियां सामने आ रही हैं। एक यूजर ने नाराजगी जताते हुए लिखा कि इस तरह का प्रदर्शन “बेशर्मी और देश की छवि को नुकसान पहुंचाने वाला कदम” है। पोस्ट में सवाल उठाया गया कि क्या विरोध दर्ज कराने के लिए सार्वजनिक मंचों के बजाय अन्य लोकतांत्रिक तरीके नहीं अपनाए जा सकते थे। इस तरह की प्रतिक्रियाएं दिखाती हैं कि घटना ने ऑनलाइन बहस को और तेज कर दिया है, जहां कुछ लोग इसे अनुचित आचरण बता रहे हैं तो कुछ इसे राजनीतिक असहमति की अभिव्यक्ति मान रहे हैं।

सोशल मीडिया पर इस घटनाक्रम को लेकर प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई है। एक अन्य यूजर ने आरोप लगाया कि जब ऑनलाइन अभियान से बात नहीं बनी तो प्रदर्शनकारियों ने भारत मंडपम पहुंचकर “ड्रामा” किया और सख्त कार्रवाई की मांग की। वहीं तीसरे यूजर ने टिप्पणी की कि नीतियों और नेतृत्व की आलोचना लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों के सामने देश की छवि प्रभावित करने वाला प्रदर्शन उचित नहीं माना जा सकता। इन पोस्ट्स से स्पष्ट है कि घटना ने डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर तीखा राजनीतिक विमर्श छेड़ दिया है, जहां विरोध की शैली और उसके प्रभाव को लेकर मतभेद उभरकर सामने आए हैं।

भाजपा ने कांग्रेस पर बोला हमला 

घटना को लेकर राजनीतिक बयानबाज़ी भी तेज हो गई है। भाजपा के आईटी विभाग के प्रमुख अमित मालवीय ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोलते हुए इस प्रदर्शन को “राष्ट्रीय कलंक” करार दिया। उन्होंने कहा कि जब भारत एक प्रतिष्ठित वैश्विक एआई शिखर सम्मेलन की मेजबानी कर रहा है और तकनीकी नवाचार व नेतृत्व को प्रदर्शित कर रहा है, ऐसे समय में व्यवधान पैदा करना दुर्भाग्यपूर्ण है। मालवीय ने आरोप लगाया कि इस तरह की कार्रवाई से देश की अंतरराष्ट्रीय छवि प्रभावित होती है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि राजनीतिक असहमति लोकतंत्र का हिस्सा है, लेकिन वैश्विक मंच पर देश की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाना उचित नहीं है। कांग्रेस की ओर से इन आरोपों पर आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है।

मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए दिल्ली सरकार के मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने भी प्रदर्शन की कड़ी निंदा की। उन्होंने आरोप लगाया कि यह विरोध सुनियोजित था और इससे अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की छवि को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की गई। सिरसा ने कहा कि लोकतंत्र में विरोध का अधिकार सभी को है, लेकिन विदेशी मेहमानों की मौजूदगी में इस प्रकार का प्रदर्शन अनुचित है। उन्होंने कांग्रेस नेतृत्व पर निशाना साधते हुए कहा कि राजनीतिक मतभेद अपनी जगह हैं, पर देश की प्रतिष्ठा सर्वोपरि होनी चाहिए। वहीं कांग्रेस की ओर से इन आरोपों पर अभी तक कोई औपचारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

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