लोकसभा सीटें 543 से बढ़कर 816 करने की तैयारी? 16 अप्रैल से संसद का विशेष सत्र बुलाने के संकेत

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नई दिल्ली: संसद के मौजूदा बजट सत्र को अहम विधायी एजेंडे के चलते आगे बढ़ा दिया गया है। अब लोकसभा और राज्यसभा की अगली बैठक 16 अप्रैल को प्रस्तावित है। सूत्रों के अनुसार, दोनों सदनों की कार्यवाही 16 से 18 अप्रैल के बीच तीन दिनों तक चल सकती है। पहले निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार बजट सत्र गुरुवार को समाप्त होना था, लेकिन अब सरकार इस दौरान एक महत्वपूर्ण विधेयक लाने की तैयारी में है।

महिला आरक्षण कानून में संशोधन की तैयारी
सूत्रों की मानें तो सरकार विस्तारित सत्र के दौरान महिला आरक्षण से जुड़े ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ में संशोधन का प्रस्ताव ला सकती है। इस संशोधन के जरिए लोकसभा की कुल सीटों में बढ़ोतरी का रास्ता भी खुल सकता है। माना जा रहा है कि यह बदलाव महिला आरक्षण के प्रभावी क्रियान्वयन से जुड़ा हो सकता है।

लोकसभा सीटें 816 तक बढ़ाने का प्रस्ताव
सरकारी मसौदे के अनुसार, महिला आरक्षण लागू होने के बाद लोकसभा की सीटों की संख्या 543 से बढ़ाकर 816 की जा सकती है। इनमें से 273 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित रखने का प्रस्ताव है। इस मसौदे पर सरकार ने विभिन्न राजनीतिक दलों के साथ चर्चा भी की है। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रीजीजू ने राज्यसभा में संकेत दिया कि जल्द ही एक ‘बहुत महत्वपूर्ण’ विधेयक के लिए सदन की बैठक फिर बुलाई जाएगी।

16 अप्रैल तक स्थगित दोनों सदन
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सदन में जानकारी दी कि संसदीय कार्य मंत्री के अनुरोध पर अब अगली बैठक 16 अप्रैल को होगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि उस दिन केवल आवश्यक सरकारी कामकाज ही लिया जाएगा, जबकि प्रश्नकाल, शून्यकाल और निजी विधेयकों का कार्य नहीं होगा। इसके बाद लोकसभा की कार्यवाही 16 अप्रैल सुबह 11 बजे तक स्थगित कर दी गई। राज्यसभा में भी उपसभापति हरिवंश ने इसी समय तक के लिए बैठक स्थगित करने की घोषणा की।

विपक्ष का विरोध, सरकार पर लगाए आरोप
सरकार के इस कदम पर विपक्ष ने आपत्ति जताई है। विपक्षी नेताओं के अनुसार, उन्हें सूचित किया गया है कि 16 से 18 अप्रैल के बीच तीन बैठकें प्रस्तावित हैं। राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने सरकार पर ‘दबंगई’ का आरोप लगाते हुए कहा कि महिला आरक्षण जैसे मुद्दे पर राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश की जा रही है। वहीं, सदन के नेता जेपी नड्डा ने कहा कि किसी भी विधेयक को कब पेश किया जाना है, इसका निर्णय सरकार का अधिकार है।

सरकार का जवाब—महिलाओं से किया वादा निभाना जरूरी
विपक्ष के आरोपों पर जवाब देते हुए संसदीय कार्य मंत्री किरेन रीजीजू ने कहा कि सरकार देश की महिलाओं से किए गए वादे को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि संसद पहले ही महिलाओं के प्रति अपनी प्रतिबद्धता जता चुकी है और इसे पूरा करना सरकार का कर्तव्य है। उन्होंने यह भी कहा कि इस मुद्दे को किसी चुनाव से जोड़ना उचित नहीं है और समयसीमा को देखते हुए इसे आगे बढ़ाना जरूरी है।

अमित शाह ने दलों के नेताओं से की बैठकें
सूत्रों के मुताबिक, सत्र के विस्तारित हिस्से में संविधान संशोधन विधेयक पेश किया जा सकता है, जिसके जरिए नारी शक्ति वंदन अधिनियम में बदलाव होगा। इस मुद्दे पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के सहयोगी दलों और कुछ क्षेत्रीय दलों के नेताओं के साथ अलग-अलग बैठकें भी की हैं। गौरतलब है कि वर्ष 2023 में महिलाओं को लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में 33 प्रतिशत आरक्षण देने वाला संविधान संशोधन विधेयक पारित किया गया था, लेकिन इसे परिसीमन प्रक्रिया के बाद ही लागू किया जाना है।

 

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