राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने वृंदावन में संत प्रेमानंद महाराज से की मुलाकात, 27 मिनट की बातचीत में आध्यात्म और ब्रज परंपरा पर हुआ संवाद
ब्रज प्रवास के दूसरे दिन राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु वृंदावन स्थित राधा केली कुंज आश्रम पहुंचीं, जहां उन्होंने संत प्रेमानंद महाराज से मुलाकात की। इस दौरान दोनों के बीच करीब 27 मिनट तक चर्चा हुई। आश्रम पहुंचने पर संत ने “राधे-राधे” कहकर राष्ट्रपति का स्वागत किया। मुलाकात के दौरान आध्यात्म, समाज और ब्रज की परंपराओं पर विस्तृत बातचीत हुई, वहीं संत प्रेमानंद महाराज ने नाम जप की महत्ता बताते हुए इसे जीवन के उद्धार का सरल मार्ग बताया। आश्रम की ओर से राष्ट्रपति को दुपट्टा, माला और प्रसाद भेंट किया गया। इस अवसर पर उनका परिवार भी मौजूद रहा।
पहले दिन प्रेम मंदिर में किए राधा-कृष्ण के दर्शन
इससे पहले दौरे के पहले दिन राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु और आनंदीबेन पटेल ने प्रेम मंदिर पहुंचकर भगवान राधा-कृष्ण के दर्शन किए। मंदिर में भोग घर द्वार से प्रवेश के बाद उनका स्वागत किया गया। गर्भगृह में उन्होंने विधि-विधान से पूजा-अर्चना की और आरती में भाग लिया। संकीर्तन मंडली के भजनों से पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया। राष्ट्रपति ने मंदिर में लेजर शो भी देखा, प्रसाद ग्रहण किया और परिसर की परिक्रमा की।
मंदिर परिसर में अन्य विग्रहों के भी किए दर्शन
प्रेम मंदिर के प्रथम तल पर पहुंचकर उन्होंने श्री सीता-राम सहित अन्य विग्रहों के दर्शन किए और विधिपूर्वक पूजा की। मंदिर प्रबंधन ने उन्हें स्मृति चिन्ह और धार्मिक साहित्य भेंट किया। इसके बाद राष्ट्रपति ने इस्कॉन मंदिर (श्री श्री कृष्ण बलराम मंदिर) का दौरा किया, जहां संतों और पदाधिकारियों ने उनका स्वागत किया। उन्होंने भगवान कृष्ण-बलराम के दर्शन कर वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच पूजा-अर्चना की और कुछ समय ध्यान भी लगाया।
सांस्कृतिक कार्यक्रम और कीर्तन का लिया आनंद
मंदिर परिसर में आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम में राष्ट्रपति ने बालिकाओं के नृत्य को देखा और सराहा। साथ ही उन्होंने कीर्तन का आनंद लिया, जिससे पूरा वातावरण भक्ति भाव से सराबोर नजर आया।
सुरक्षा व्यवस्था रही चाक-चौबंद
राष्ट्रपति के दौरे को देखते हुए पूरे वृंदावन में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। प्रशासन और पुलिस पूरी तरह सतर्क रही और सभी कार्यक्रमों के दौरान व्यवस्थाएं सुचारू रूप से संचालित की गईं। ब्रज प्रवास के दूसरे दिन की शुरुआत संत प्रेमानंद महाराज से मुलाकात के साथ हुई, जिसने इस दौरे को विशेष बना दिया। यह मुलाकात आस्था और संवाद का एक संतुलित उदाहरण रही।