रेलवे ने टिकट कैंसिलेशन के साथ-साथ यात्रा से जुड़े अन्य नियमों में भी अहम बदलाव किए हैं। पहले जहां यात्रियों को ट्रेन छूटने से चार घंटे पहले तक टिकट कैंसिल करने पर कुछ रिफंड मिल जाता था, वहीं अब यह सीमा बढ़ाकर आठ घंटे कर दी गई है। यानी अब यात्रियों को अपनी यात्रा का फैसला पहले ही लेना होगा, क्योंकि अंतिम समय तक टिकट होल्ड करके रखने की आदत पर रोक लगेगी। इसके अलावा रेलवे ने चार्ट तैयार करने का समय भी बढ़ाकर आठ घंटे पहले कर दिया है, जिससे सीटों का आवंटन समय से हो सके और वेटिंग लिस्ट वाले यात्रियों को पहले ही स्पष्ट स्थिति मिल जाए।
रेलवे द्वारा किए जा रहे ये नए बदलाव 1 से 15 अप्रैल के बीच चरणबद्ध तरीके से लागू किए जाएंगे। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने मंगलवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि ये कदम “52 हफ्तों में 52 सुधार” अभियान के तहत उठाए जा रहे हैं। उनका कहना है कि इन बदलावों का उद्देश्य रेलवे सिस्टम में पारदर्शिता बढ़ाना और खाली सीटों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित करना है। इससे वेटिंग लिस्ट वाले यात्रियों को कन्फर्म टिकट मिलने की संभावना बढ़ेगी और यात्रियों के लिए अपनी यात्रा की योजना पहले से और अधिक आसानी से बनाना संभव हो सकेगा।
रेलवे के इस फैसले का एक बड़ा मकसद टिकटों की कालाबाजारी पर लगाम लगाना भी है। अक्सर देखा जाता था कि कुछ एजेंट बड़ी संख्या में टिकट बुक कर लेते थे और जरूरत न होने पर आखिरी समय में उन्हें कैंसिल कर पैसा वापस ले लेते थे, जिससे आम यात्रियों को कन्फर्म टिकट मिलने में दिक्कत होती थी। नए नियमों के तहत अब ऐसी प्रवृत्तियों पर रोक लगेगी, क्योंकि रिफंड पूरी तरह इस बात पर निर्भर करेगा कि टिकट कितने समय पहले कैंसिल किया गया है। इससे फर्जी बुकिंग कम होगी और वास्तविक यात्रियों को समय पर सीट मिलने की संभावना बढ़ेगी।
रेलवे के नए नियमों के तहत अब टिकट कैंसिलेशन पर मिलने वाला रिफंड पूरी तरह समय सीमा के आधार पर तय होगा। अगर कोई यात्री ट्रेन छूटने से 72 घंटे पहले टिकट रद्द करता है तो उसे लगभग पूरा किराया वापस मिल जाएगा, जिसमें सिर्फ एक तय शुल्क काटा जाएगा। वहीं, यात्रा से 72 से 24 घंटे के बीच टिकट कैंसिल कराने पर 25 प्रतिशत राशि काटी जाएगी। इसके अलावा 24 घंटे से लेकर 8 घंटे के बीच टिकट रद्द करने पर अब 50 प्रतिशत किराया काट लिया जाएगा। पहले यह कटौती 12 से 4 घंटे के बीच लागू होती थी, लेकिन नई व्यवस्था में समय सीमा बढ़ाकर इसे और सख्त कर दिया गया है, ताकि यात्रियों को पहले ही निर्णय लेने के लिए प्रोत्साहित किया जा सके।
रेलवे ने टिकट कैंसिलेशन नियमों में बदलाव करते हुए रिफंड स्ट्रक्चर को अधिक स्पष्ट और सख्त बना दिया है। अब यदि कोई यात्री ट्रेन के प्रस्थान से 72 घंटे से अधिक पहले टिकट रद्द करता है, तो प्रति यात्री एक तय रद्दीकरण शुल्क काटकर लगभग पूरा रिफंड दिया जाएगा। पहले के नियमों में 48 घंटे से अधिक समय पहले टिकट रद्द करने पर पूरा पैसा वापस मिल जाता था, जबकि 48 से 12 घंटे के बीच कैंसिलेशन पर 25 प्रतिशत कटौती होती थी। नई व्यवस्था में समय सीमा बढ़ाकर इसे 72 घंटे कर दिया गया है, जिससे यात्रियों को पहले से योजना बनाने के लिए प्रेरित किया जा सके। साथ ही, रेलवे ने यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए कुछ अतिरिक्त सुविधाएं भी जारी रखी हैं, ताकि यात्रा अनुभव बेहतर और अधिक पारदर्शी बन सके।
रेलवे ने यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए टिकट कैंसिलेशन प्रक्रिया को पहले से ज्यादा आसान बना दिया है। अब अगर किसी यात्री ने काउंटर से टिकट लिया है, तो उसे रद्द कराने के लिए उसी स्टेशन पर जाने की जरूरत नहीं होगी—देश के किसी भी रेलवे स्टेशन से टिकट कैंसिल कराया जा सकेगा। वहीं ई-टिकट के मामले में भी प्रक्रिया को सरल बनाया गया है, जहां टिकट कैंसिल करते ही रिफंड की प्रक्रिया अपने आप शुरू हो जाएगी। इस बदलाव से यात्रियों को अनावश्यक भागदौड़ से राहत मिलेगी और पूरे सिस्टम को अधिक सुविधाजनक और यूजर-फ्रेंडली बनाया जा सकेगा।
रेलवे ने नए नियमों में यात्रियों को राहत देने के प्रावधान भी शामिल किए हैं। अगर किसी वजह से ट्रेन रद्द हो जाती है या तीन घंटे से अधिक देरी से चलती है, तो यात्रियों को पूरा किराया वापस किया जाएगा। इसके अलावा, यदि वेटिंग टिकट चार्ट बनने के बाद भी कन्फर्म नहीं होता है, तो वह अपने आप रद्द हो जाएगा और यात्री को पूरी राशि स्वतः रिफंड कर दी जाएगी। इस व्यवस्था से यात्रियों को अनिश्चितता से राहत मिलेगी और रिफंड पाने की प्रक्रिया भी पहले से ज्यादा आसान और पारदर्शी हो जाएगी।
रेलवे ने बोर्डिंग से जुड़े नियमों में भी अहम बदलाव किए हैं, जिससे यात्रियों को अधिक लचीलापन मिल सके। अब यात्री ट्रेन छूटने से 30 मिनट पहले तक अपना बोर्डिंग स्टेशन बदल सकते हैं, जो खासकर बड़े शहरों में रहने वाले लोगों के लिए काफी फायदेमंद साबित होगा, जहां एक ही शहर में कई रेलवे स्टेशन होते हैं। हालांकि, रेलवे ने यह भी स्पष्ट किया है कि एक बार बोर्डिंग स्टेशन बदलने के बाद यात्री पुराने स्टेशन से यात्रा शुरू नहीं कर पाएंगे, इसलिए यह विकल्प सोच-समझकर चुनना होगा।
कुल मिलाकर रेलवे के ये नए नियम यात्रियों को समय रहते फैसला लेने के लिए प्रोत्साहित करते हैं। अब यदि कोई यात्री यात्रा नहीं करना चाहता है, तो उसे टिकट जल्द से जल्द कैंसिल करना होगा, ताकि अधिकतम रिफंड मिल सके। वहीं आखिरी समय तक इंतजार करने पर नुकसान लगभग तय माना जा रहा है। इन बदलावों का मुख्य उद्देश्य सीटों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित करना, वेटिंग लिस्ट को कम करना और पूरे टिकटिंग सिस्टम को ज्यादा पारदर्शी व प्रभावी बनाना है, जिससे वास्तविक यात्रियों को समय पर कन्फर्म टिकट मिल सके।
Recover your password.
A password will be e-mailed to you.