RBI ने रेपो रेट में नहीं किया कोई बदलाव, 5.5 प्रतिशत पर ही स्थिर रहेंगी दरें

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नई दिल्ली: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने 4 अगस्त को शुरू हुई मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) की मीटिंग में हुए फैसलों की आज घोषणा कर दी। भारतीय रिजर्व बैंक ने रेपो रेट को 5.5 प्रतिशत पर ही स्थिर रखने का फैसला किया है। आरबीआई गवर्नर ने इस बार रेपो रेट में किसी भी तरह के बदलाव का ऐलान नहीं किया। बताते चलें कि आरबीआई इस साल रेपो रेट में 1.00 प्रतिशत की कटौती कर चुका है। केंद्रीय बैंक ने इस साल फरवरी, अप्रैल और जून में रेपो रेट घटाया था। आरबीआई ने इस साल फरवरी में 0.25 प्रतिशत, अप्रैल में 0.25 प्रतिशत और फिर जून में 0.50 प्रतिशत रेपो रेट घटाया था।

मौजूदा परिस्थितियों को ध्यान में रखकर लिया गया फैसला
संजय मल्होत्रा ने बताया कि मौजूदा परिस्थितियों को ध्यान में रखे हुए मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी ने रेपो रेट को स्थिर रखने का फैसला किया है। आरबीआई ने चालू वित्त वर्ष के लिए खुदरा महंगाई दर के अनुमान को घटाकर 3.1 प्रतिशत कर दिया गया है जबकि पहले इसके 3.7 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया गया था। गवर्नर ने कहा कि रेपो रेट में की गई 1 प्रतिशत की कटौती का प्रभाव अभी पूरी तरह नहीं दिखा है। इसके अलावा, मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी ने अपने न्यूट्रल रुख को भी कायम रखने का फैसला किया है।

एमपीसी ने कहा, ”मुद्रास्फीति पहले के अनुमान से काफी कम है, लेकिन इसका मुख्य कारण खाद्य कीमतों में उतार-चढ़ाव है। इस वित्तीय वर्ष की अंतिम तिमाही से मुद्रास्फीति में बढ़ोतरी का अनुमान है। हमारे पहले के अनुमानों के अनुसार, विकास दर मजबूत है। टैरिफ की अनिश्चितताएं अभी भी उभर रही हैं। व्यापक आर्थिक परिस्थितियों को देखते हुए रेपो रेट को 5.5% पर बनाए रखना जरूरी है।”

एसडीएफ और एमएसएफ रेट को भी स्थिर रखने की घोषणा
आरबीआई गवर्नर ने कहा कि देश में मानसून अच्छी प्रगति कर रहा है, जिससे अर्थव्यवस्था में तेजी आएगी। भारतीय रिजर्व बैंक ने इसके साथ ही SDF (स्टैंडिंग डिपॉजिट फैसिलिटी) रेट को भी 5.25 प्रतिशत पर स्थिर रखने का ऐलान किया है। इसके अलावा, MSF (मार्जिनल स्टैंडिंग फैसिलिटी) रेट को भी बिना बदलाव किए 5.75 प्रतिशत पर स्थिर रखने का फैसला किया गया है।

आरबीआई ने चालू वित्त वर्ष 2025-26 के लिए जीडीपी ग्रोथ का अनुमान 6.5 प्रतिशत पर बरकरार रखा है। आरबीआई गवर्नर ने कहा कि जोखिम दोनों ओर संतुलित और भू-राजनीतिक तनाव बाधाएं उत्पन्न कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि इंडस्ट्रियल सेक्टर का ग्रोथ सुस्त और असमतल है।

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