LPG Crisis: युद्ध के बीच राहत, भारत ने अमेरिका से खरीदी बड़ी मात्रा में गैस; किचन सप्लाई रहेगी सुचारु

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मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध के असर से वैश्विक ईंधन आपूर्ति पर दबाव बढ़ा है, लेकिन भारत सरकार ने समय रहते बड़ा कदम उठाकर घरेलू जरूरतों को सुरक्षित करने की दिशा में पहल की है। एलपीजी की संभावित कमी को देखते हुए भारत ने अमेरिका से बड़ी मात्रा में गैस खरीदकर आपूर्ति बनाए रखने की रणनीति अपनाई है, जिससे आम उपभोक्ताओं की किचन पर असर नहीं पड़ेगा।

अमेरिका से 1.76 लाख टन एलपीजी की खरीद
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, भारत ने अमेरिका से 1 लाख 76 हजार टन एलपीजी की खरीद की है। 19 मार्च को समाप्त सप्ताह में कुल एलपीजी आयात घटकर 2,65,000 टन रह गया, जो मार्च की शुरुआत में 3,22,000 टन था। ऐसे में वैकल्पिक स्रोतों से आपूर्ति बढ़ाना जरूरी हो गया था।

खाड़ी देशों से सप्लाई में बड़ी गिरावट
पश्चिम एशिया से एलपीजी की आपूर्ति घटकर केवल 89,000 टन रह गई है, जो जनवरी 2026 के बाद का सबसे निचला स्तर है। भारत अपनी कुल एलपीजी जरूरत का लगभग 60 प्रतिशत आयात करता है, जिसमें पहले करीब 90 प्रतिशत हिस्सा खाड़ी देशों से आता था। मौजूदा हालात में इस व्यवस्था में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है।

अमेरिका बना नया बड़ा सप्लायर
खाड़ी देशों से आपूर्ति घटने के बाद भारत ने अमेरिका की ओर रुख किया है। 19 मार्च वाले सप्ताह में वैकल्पिक स्रोतों से आयात बढ़कर 1,76,000 टन हो गया, जिसमें सबसे बड़ा योगदान अमेरिका का है। अनुमान है कि वर्ष 2026 में भारत अमेरिका से 2.2 मिलियन टन एलपीजी आयात कर सकता है। पहली बार अमेरिकी आपूर्ति पारंपरिक खाड़ी देशों से अधिक दर्ज की गई है।

ट्रांसपोर्ट लागत और स्टॉक मैनेजमेंट चुनौती
हालांकि वैकल्पिक आपूर्ति से राहत जरूर मिली है, लेकिन लंबी दूरी के कारण परिवहन लागत बढ़ने की आशंका है। अधिकारियों के अनुसार अमेरिका से कुछ एलपीजी जहाज भारत पहुंच चुके हैं, लेकिन आने वाले हफ्तों में स्टॉक प्रबंधन एक बड़ी चुनौती बना रह सकता है।

 

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