यूपी में पीएम आवास का इंतजार कर रहे 1 लाख से ज्यादा परिवारों को राहत, 205 नगर निकायों में घर बनाने की मंजूरी

0 21
लखनऊ: उत्तर प्रदेश में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पक्के घर का इंतजार कर रहे लोगों के लिए बड़ी राहत की खबर है। राज्य के 205 नगर निकायों में 1,01,483 नए आवास बनाने के प्रस्ताव को मंजूरी मिल गई है। मुख्य सचिव एसपी गोयल की अध्यक्षता में गुरुवार को हुई राज्य स्तरीय स्वीकृति एवं निगरानी समिति की बैठक में यह फैसला लिया गया। इस स्वीकृति के बाद प्रधानमंत्री आवास योजना शहरी 2.0 के तहत प्रदेश में मंजूर आवासों की कुल संख्या बढ़कर 5,90,007 हो जाएगी।

205 नगर निकायों में बनेंगे 1,01,483 नए मकान

प्रधानमंत्री आवास योजना शहरी 2.0 के लाभार्थी आधारित व्यक्तिगत आवास निर्माण (बीएलसी) घटक के तहत इन नए घरों को मंजूरी दी गई है। मुख्य सचिव की अध्यक्षता में हुई बैठक में प्रस्ताव पर मुहर लगाई गई।

मुख्य सचिव एसपी गोयल ने कहा कि शहरी क्षेत्रों में पात्र और जरूरतमंद परिवारों को पक्का मकान उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है। इस फैसले से ऐसे परिवारों को आवास की सुविधा मिलने के साथ उनके जीवन स्तर में सुधार लाने में मदद मिलेगी।

13 आवासीय परियोजनाओं पर भी हुआ फैसला

बैठक में प्रधानमंत्री आवास योजना शहरी के भागीदारी में किफायती आवास (एएचपी) घटक के तहत स्वीकृत 13 परियोजनाओं की भी समीक्षा की गई। इन परियोजनाओं के लिए तीसरे पक्ष की गुणवत्ता निगरानी के तहत मिली रिपोर्ट के आधार पर तैयार अनुपालन आख्या (एटीआर) को मंजूरी दी गई।

इस स्वीकृति के बाद संबंधित परियोजनाओं के लिए केंद्र सरकार से अगली किस्त मिलने का रास्ता साफ होगा। मुख्य सचिव ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि एएचपी घटक के तहत मंजूर सभी आवासीय परियोजनाओं को तय समय सीमा में गुणवत्ता के साथ पूरा कराया जाए। उन्होंने निर्माण कार्यों की नियमित निगरानी और समयबद्धता पर विशेष जोर दिया।

बैठक में प्रमुख सचिव नगर विकास पी. गुरुप्रसाद समेत संबंधित विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।

भू-उपयोग परिवर्तन के पुराने मामलों का होगा परीक्षण

आवासीय योजनाओं के साथ ही शासन भू-उपयोग परिवर्तन से जुड़े लंबे समय से लंबित मामलों का भी परीक्षण कराने की तैयारी कर रहा है। खास तौर पर औद्योगिक और संस्थागत भू-उपयोग से जुड़े मामलों की समीक्षा होगी। इसमें यह पता लगाया जाएगा कि जमीन का उपयोग बदलने में किस तरह की अड़चनें आ रही हैं।

अधिकारियों को विकास प्राधिकरणों से इन मामलों की विस्तृत रिपोर्ट लेने की तैयारी है। यदि किसी मामले में छोटी-मोटी आपत्तियां हैं तो उन्हें दूर कराकर भू-उपयोग परिवर्तन की प्रक्रिया तेज की जाएगी। हालांकि, विवादित मामलों पर विचार नहीं किया जाएगा।

6 हजार वर्ग मीटर तक के भूखंडों पर विकास प्राधिकरण ले सकेंगे फैसला

आवास एवं शहरी नियोजन विभाग ने भू-उपयोग परिवर्तन की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाने के लिए अधिकारों का बंटवारा किया है। अब छह हजार वर्ग मीटर तक के भूखंडों का भू-उपयोग बदलने का अधिकार विकास प्राधिकरणों को दिया गया है। इससे बड़े भूखंडों से जुड़े मामलों का निस्तारण शासन स्तर पर किया जाएगा।

अक्टूबर से पहले भू-उपयोग परिवर्तन के सभी मामलों का फैसला शासन स्तर पर ही किया जा रहा था। अब व्यवस्था में बदलाव के बाद स्थानीय स्तर पर छोटे भूखंडों से जुड़े मामलों के निपटारे में आसानी होगी।

उद्योगों और संस्थानों के लिए आसान होगी जमीन के उपयोग में बदलाव की प्रक्रिया

शासन का उद्देश्य उद्योगों और संस्थानों के लिए भू-उपयोग परिवर्तन में आने वाली अनावश्यक बाधाओं को दूर करना है। इसके लिए पहले विकास प्राधिकरणों से यह रिपोर्ट ली जाएगी कि संबंधित जमीन का उपयोग बदलने में स्थानीय स्तर पर कोई अड़चन तो नहीं है। प्राधिकरणों की रिपोर्ट के आधार पर लंबे समय से लंबित मामलों के निस्तारण का रास्ता निकाला जाएगा।

इसके अलावा आवासीय से व्यावसायिक और कृषि से अन्य श्रेणियों में भू-उपयोग परिवर्तन के मामलों की भी जांच होगी। जहां कोई आपत्ति या बाधा नहीं होगी, वहां प्रक्रिया को आसान बनाया जाएगा। शासन का स्पष्ट रुख है कि बिना वजह भू-उपयोग परिवर्तन के मामलों को लंबित नहीं रखा जाना चाहिए।

 

नोट: अगर आपको यह खबर पसंद आई तो इसे शेयर करना न भूलें, देश-विदेश से जुड़ी ताजा अपडेट पाने के लिए कृपया Vnation के Facebook पेज को Like व Twitter पर Follow करना न भूलें...
Leave A Reply

Your email address will not be published.