पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना को लेकर गौतमबुद्धनगर में समीक्षा बैठक, सोलर रूफटॉप बढ़ाने और लंबित ऋण मामलों के निस्तारण के निर्देश
गौतमबुद्धनगर में पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर जिला प्रशासन ने समीक्षा बैठक आयोजित की। कलेक्ट्रेट सभागार में मुख्य विकास अधिकारी डॉ. शिवाकांत द्विवेदी की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में योजना के तहत प्रगति, लंबित मामलों और लाभार्थियों तक योजना का लाभ पहुंचाने की रणनीति पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक का मुख्य उद्देश्य अधिक से अधिक उपभोक्ताओं को योजना से जोड़ना और सोलर ऊर्जा को बढ़ावा देना रहा।
लंबित ऋण मामलों को जल्द निपटाने के निर्देश
बैठक के दौरान मुख्य विकास अधिकारी ने बैंकों में लंबित पड़े ऋण वितरण से जुड़े मामलों पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पेंडेंसी सूची के अनुसार सभी लंबित प्रकरणों का जल्द निस्तारण किया जाए ताकि उपभोक्ताओं को समय पर योजना का लाभ मिल सके। इस दौरान अग्रणी बैंक प्रबंधक, पंजीकृत सोलर वेंडर्स, बिजली विभाग के अधिकारी और आरडब्ल्यूए व एओए प्रतिनिधियों के साथ विस्तार से चर्चा की गई। अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि जिले में तय लक्ष्य के अनुरूप अधिक से अधिक लोगों का पंजीकरण कराया जाए और निजी घरों में ग्रिड से जुड़े सोलर रूफटॉप संयंत्र स्थापित किए जाएं।
जागरूकता बढ़ाने और अधिक आवेदन कराने पर जोर
अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि योजना का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए और पात्र लाभार्थियों को इसके बारे में जागरूक किया जाए। साथ ही इच्छुक लोगों को ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से आवेदन करने में सहयोग देने पर भी जोर दिया गया। प्रशासन का मानना है कि सोलर रूफटॉप संयंत्रों की संख्या बढ़ने से स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा मिलेगा और उपभोक्ताओं को सस्ती तथा पर्यावरण के अनुकूल बिजली उपलब्ध हो सकेगी।

योजना के तहत मिल रहा आकर्षक अनुदान
बैठक में योजना से जुड़ी वित्तीय सहायता की जानकारी भी दी गई। अधिकारियों के अनुसार एक किलोवाट क्षमता के सोलर संयंत्र पर करीब 45 हजार रुपये का अनुदान दिया जा रहा है, जिसमें केंद्र सरकार की ओर से 30 हजार रुपये और राज्य सरकार की ओर से 15 हजार रुपये शामिल हैं। दो किलोवाट क्षमता पर लगभग 90 हजार रुपये का अनुदान मिलता है, जबकि तीन किलोवाट या उससे अधिक क्षमता के संयंत्र पर करीब एक लाख आठ हजार रुपये तक की सहायता उपलब्ध कराई जा रही है।
25 साल तक चलने वाले सोलर पैनल, बिजली बिल में बड़ी बचत
बैठक में बताया गया कि सोलर संयंत्र लगाने की अनुमानित लागत करीब 60 हजार रुपये प्रति किलोवाट होती है, लेकिन अनुदान मिलने के बाद उपभोक्ता को काफी कम राशि खर्च करनी पड़ती है। सोलर पैनलों की कार्यक्षमता लगभग 25 वर्ष तक रहती है और इससे बिजली बिल में दो-तिहाई तक की बचत संभव है। अधिकारियों के अनुसार संयंत्र पर खर्च की गई राशि लगभग तीन से चार वर्षों में ही वापस निकल आती है।
डीबीटी के माध्यम से सीधे खाते में मिलता है अनुदान
बैठक में यह भी स्पष्ट किया गया कि सोलर रूफटॉप संयंत्र केवल पंजीकृत वेंडर के माध्यम से ही लगवाया जाए। संयंत्र की स्थापना और कमीशनिंग के बाद अनुदान की राशि डीबीटी के जरिए सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में भेजी जाती है। जरूरत पड़ने पर उपभोक्ता लगभग सात प्रतिशत ब्याज दर पर बैंक से ऋण भी ले सकते हैं। इच्छुक लोग योजना के राष्ट्रीय पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं और अधिक जानकारी के लिए संबंधित कार्यालय से संपर्क कर सकते हैं।
बैठक में जिला दिव्यांगजन सशक्तिकरण अधिकारी आशीष कुमार, जिला लीड बैंक प्रबंधक राजेश कटारिया, विभिन्न विभागों के अधिकारी, बैंक प्रतिनिधि, पंजीकृत सोलर वेंडर्स तथा आरडब्ल्यूए और एओए के प्रतिनिधि मौजूद रहे।