नई दिल्ली : भारत राष्ट्र समिति (BRS) की निलंबित विधानसभा परिषद सदस्य के कविता (kavita) ने अपनी पिता की पार्टी को छोड़ने का ऐलान कर दिया है। सोमवार को विधान परिषद के से विदाई के मौके पर वह भावुक हो गईं और उन्होंने कहा कि अब बीआरएस (BRS) से उनका रास्ता अलग हहो रहा है। उन्होंने कहा कि पिता केसीआर के विरोध के बाद भी राज्य में कॉन्ट्रैक्ट सिस्टम बढ़ता चला गया। जब उन्होंने इसका विरोध किया तो उनके खिलाफ साजिश शुरू हो गई। उन्होंने कहा कि राज्य में बहुत ही कमजोर निर्माण हो रहे हं और भ्रष्टाचार चरम पर पहुंच गया है। 1969 के आंदोलन के लोगों को भी नजर अंदाज किया गया और सच बोलने वालों को किनारे लगा दिया जाता है।
उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचारियों की पोल खुलने के बाद भी उनपर कार्रवाई नहीं होती थी। के कविता ने कहा था कि उन्होंने टीआरएस का नाम बदलकर बीआरएस करने का विरोध किया था। उनका कहना था कि स्वार्थ के चलते ही तेलंगाना के हितों को नजरअंदाज किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि बीारएस अब संविधान का भी पालन नहीं करती। कविता ने विधान परिषद में यह भी कहा कि बीआरएस शासनकाल के दौरान लिए गए कुछ अलोकप्रिय निर्णयों में उनकी कोई भूमिका नहीं थी।
पार्टी का संविधान केवल मजाक
पिछले साल सितंबर में बीआरएस से निलंबित होने के तुरंत बाद विधान परिषद से इस्तीफा दे दिया था। उन्होंने बीआरएस से अपने निलंबन से संबंधित घटनाक्रन को याद करते हुए कहा कि पार्टी की जिस अनुशासनात्मक कार्रवाई समिति ने उन्हें निलंबित किया, वह रातोंरात अस्तित्व में आ गई और कारण बताओ नोटिस जारी करने जैसी कोई प्रक्रिया नहीं अपनाई गई। कविता ने कहा, “उन्होंने अनुशासनात्मक कार्रवाई समिति का हवाला दिया। राष्ट्रीय स्तर पर काम करने की चाह रखने वाली बीआरएस का संविधान मात्र आठ पन्नों का है। मैं आज साहसपूर्वक कह रही हूं कि बीआरएस का संविधान एक मजाक है।’
पिता पर भी लगाए आरोप

उन्होंने निलंबन में किसी भी प्रक्रिया का पालन न किए जाने का दावा करते हुए कहा, ‘यह निश्चित रूप से पार्टी चलाने का तरीका नहीं है।’ कविता ने पिता केसीआर के नेतृत्व वाली बीआरएस सरकार के दौरान कलेक्ट्रेट भवनों के निर्माण में भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए कहा कि सिद्दिपेट और सिरसिल्ला स्थित भवन भारी बारिश के कारण जलमग्न हो गए थे।
विधान परिषद की पूर्व सदस्य ने कहा, “उन्होंने सरकार में हो रहे भ्रष्टाचार को उनके (केसीआर के) संज्ञान में लाया था। अमर ज्योति, आंबेडकर प्रतिमा, सचिवालय से लेकर कलेक्ट्रेट तक हर जगह भ्रष्टाचार हुआ है। इसका सबसे बड़ा उदाहरण वे दो कलेक्ट्रेट हैं, जो निर्माण के बाद पहली बारिश में ही जलमग्न हो गए थे।” कविता ने यह भी बताया कि उन्होंने पिछले साल तीन सितंबर को विधान परिषद की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था, लेकिन परिषद के सभापति ने इसे अब तक स्वीकार नहीं किया है।