पश्चिम बंगाल में SIR विवाद ने मचाई हलचल: TMC चुनाव आयोग से करेगी अहम मुलाकात, 27 लाख वोटर सूची से गायब

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कोलकाता: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले मतदाता सूची में अचानक कटौती ने सियासी तापमान बढ़ा दिया है। SIR के दौरान 27 लाख मतदाताओं के नाम हटने के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने चुनाव आयोग से सीधे सवाल उठाए हैं। इस मामले में टीएमसी का डेलिगेशन बुधवार को दिल्ली में चुनाव आयोग से मुलाकात करेगा। डेलिगेशन में डेरेक ओ’ब्रायन, मेनका गुरुस्वामी, सागरिका घोष और साकेत गोखले शामिल रहेंगे। बैठक सुबह 10 बजे होने वाली है।

TMC नेताओं ने चुनाव आयोग पर लगाया पक्षपात का आरोप

टीएमसी सांसद डेरेक ओ’ब्रायन ने कहा, “यदि चुनाव आयोग बंगाल में 27 लाख मतदाताओं के नाम विचाराधीन सूची से हटाता है तो यह गंभीर अपराध होगा।” उन्होंने मतदाता अधिकारों की सुरक्षा पर जोर देते हुए कहा कि किसी भी असली मतदाता को नुकसान नहीं होने दिया जाएगा।

टीएमसी सांसद सागरिका घोष ने कहा, “पहले चरण की मतदाता सूची फ्रीज़ हो चुकी है और 27 लाख लोग सूची से गायब हैं। यदि कोई असली मतदाता इस सूची से हट गया तो उसे अपना नाम कैसे वापस दर्ज कराना होगा, यह बड़ा सवाल है।” उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग निष्पक्ष नहीं रह रहा है। सागरिका ने बताया कि वरिष्ठ नेता चंद्रिमा भट्टाचार्य ने आयोग को पत्र लिखकर समय मांगा था, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। “हमारी प्रेस वार्ता के बाद आयोग ने सिर्फ बुधवार सुबह 10 बजे का समय दिया। यह दिखाता है कि आयोग दबंग बनने की कोशिश कर रहा है, लेकिन डरा हुआ है।”

पश्चिम बंगाल में चुनाव की तारीखें तय, मतदाता सूची विवाद जारी

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 23 और 29 अप्रैल को होंगे और परिणाम 4 मई 2026 को घोषित किए जाएंगे। इस बार चुनाव से पहले जिलावार नई मतदाता सूची जारी की गई है, जिसमें अब तक लगभग 91 लाख मतदाताओं के नाम हटाए जा चुके हैं। TMC का आरोप है कि यह कटौती बड़े पैमाने पर पक्षपात और मतदाता अधिकारों के उल्लंघन का मामला है।

 

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