Smoking vs Air Pollution: फेफड़ों का सबसे बड़ा दुश्मन कौन? डॉक्टरों ने बताया किससे ज्यादा होता है नुकसान
नई दिल्ली: बढ़ते वायु प्रदूषण और धूम्रपान की आदतों के बीच एक सवाल अक्सर लोगों के मन में उठता है कि आखिर फेफड़ों के लिए ज्यादा खतरनाक क्या है—स्मोकिंग या प्रदूषित हवा? स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि दोनों ही फेफड़ों के लिए गंभीर खतरा हैं, लेकिन इनके असर और जोखिम की प्रकृति अलग-अलग होती है।
भारत दुनिया के उन देशों में शामिल है जहां वायु प्रदूषण सार्वजनिक स्वास्थ्य की बड़ी चुनौती बना हुआ है। वहीं धूम्रपान आज भी फेफड़ों और श्वसन तंत्र से जुड़ी गंभीर बीमारियों का प्रमुख कारण माना जाता है।
धूम्रपान क्यों माना जाता है बड़ा खतरा?
विशेषज्ञों के अनुसार, सिगरेट के धुएं में 7,000 से अधिक रासायनिक तत्व पाए जाते हैं। इनमें सैकड़ों पदार्थ शरीर के लिए हानिकारक होते हैं, जबकि कई रसायनों को कैंसर पैदा करने वाला माना गया है।
धूम्रपान के दौरान ये विषैले तत्व सीधे फेफड़ों तक पहुंचते हैं और धीरे-धीरे उनकी कार्यक्षमता को प्रभावित करने लगते हैं। लंबे समय तक स्मोकिंग करने वालों में फेफड़ों का कैंसर, क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (COPD), ब्रोंकाइटिस और अन्य गंभीर श्वसन रोगों का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि नियमित धूम्रपान करने वाले व्यक्ति के फेफड़े लगातार जहरीले रसायनों के संपर्क में रहते हैं, जिससे स्थायी नुकसान होने की आशंका बढ़ जाती है।
वायु प्रदूषण भी कम नहीं है खतरनाक
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि वायु प्रदूषण को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। प्रदूषित हवा में मौजूद सूक्ष्म कण, विशेष रूप से PM2.5 और PM10, सांस के जरिए फेफड़ों के भीतर तक पहुंच जाते हैं।
लंबे समय तक प्रदूषित वातावरण में रहने से अस्थमा, एलर्जी, ब्रोंकाइटिस और फेफड़ों की कार्यक्षमता में कमी जैसी समस्याएं विकसित हो सकती हैं। महानगरों और औद्योगिक क्षेत्रों में रहने वाले लोगों पर इसका प्रभाव अधिक देखा जाता है।
फेफड़ों के लिए ज्यादा खतरनाक कौन?
विशेषज्ञों के मुताबिक इसका एक सीधा जवाब देना आसान नहीं है। खतरे की गंभीरता इस बात पर निर्भर करती है कि व्यक्ति कितनी मात्रा और कितने समय तक इन दोनों कारकों के संपर्क में रहता है।
यदि कोई व्यक्ति नियमित रूप से धूम्रपान करता है, तो उसके लिए स्मोकिंग आमतौर पर अधिक नुकसानदायक मानी जाती है क्योंकि वह सीधे और लगातार विषैले रसायनों को शरीर में पहुंचा रहा होता है।
वहीं जो लोग धूम्रपान नहीं करते लेकिन वर्षों तक अत्यधिक प्रदूषित वातावरण में रहते हैं, उनके फेफड़ों पर भी गंभीर असर पड़ सकता है। कई शोधों में वायु प्रदूषण को भी फेफड़ों और हृदय रोगों के प्रमुख कारणों में शामिल किया गया है।
फेफड़ों को स्वस्थ रखने के लिए अपनाएं ये उपाय
धूम्रपान और तंबाकू उत्पादों से पूरी तरह दूरी बनाएं।
अधिक प्रदूषण वाले दिनों में बाहर निकलते समय गुणवत्ता वाला मास्क पहनें।
घर और कार्यस्थल में पर्याप्त वेंटिलेशन सुनिश्चित करें।
नियमित व्यायाम और श्वसन संबंधी गतिविधियों को दिनचर्या का हिस्सा बनाएं।
खांसी, सांस फूलना या सीने में जकड़न जैसी समस्याओं को नजरअंदाज न करें।
समय-समय पर स्वास्थ्य जांच और फेफड़ों की जांच कराते रहें।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का निष्कर्ष है कि धूम्रपान और वायु प्रदूषण दोनों ही फेफड़ों के लिए गंभीर खतरा हैं। हालांकि नियमित धूम्रपान करने वालों में जोखिम अपेक्षाकृत अधिक माना जाता है, लेकिन प्रदूषित वातावरण में लंबे समय तक रहना भी फेफड़ों को धीरे-धीरे नुकसान पहुंचा सकता है।