लखनऊ। उत्तर प्रदेश में हार्ट अटैक के मरीजों को समय पर और बेहतर इलाज देने की दिशा में सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। स्टेमी (ST-Elevation Myocardial Infarction) योजना की सफलता से उत्साहित राज्य सरकार सभी सरकारी और ऑटोनॉमस मेडिकल कॉलेजों में आधुनिक कैथ लैब स्थापित करने जा रही है। इसके तहत प्रदेश के 31 मेडिकल कॉलेजों में नई कैथ लैब बनाई जाएंगी, जिससे गंभीर हृदय रोगियों को तत्काल उन्नत इलाज मिल सकेगा।
गोल्डन आवर में इलाज से बच रही हैं जिंदगियां
बाराबंकी के हैदरगढ़ में जनवरी के पहले सप्ताह 40 वर्षीय दुकानदार को अचानक सीने में तेज दर्द उठा। उन्हें नजदीकी सीएचसी ले जाया गया, जहां ईसीजी कर रिपोर्ट डॉक्टरों के व्हाट्सएप ग्रुप पर साझा की गई। डॉक्टरों की सलाह पर पहले घंटे यानी गोल्डन आवर में खून पतला करने का इंजेक्शन दिया गया और बाद में लखनऊ स्थित डॉ. राम मनोहर लोहिया चिकित्सा संस्थान रेफर कर एंजियोग्राफी और एंजियोप्लास्टी से उनकी जान बचाई गई। इसी तरह पिछले सप्ताह सीतापुर के जजौर गांव में 57 वर्षीय व्यक्ति को भी इसी त्वरित इलाज से जीवनदान मिला।
881 मरीजों की जान बचने से सरकार का हौसला बढ़ा
मार्च 2025 से अब तक प्रदेश में स्टेमी योजना के तहत 881 हार्ट अटैक मरीजों की जान बचाई जा चुकी है। इसी सकारात्मक परिणाम के बाद सरकार ने कुल 41 मेडिकल कॉलेजों में कैथ लैब स्थापित करने का लक्ष्य तय किया है। वर्तमान में 10 मेडिकल कॉलेजों में कैथ लैब संचालित हैं, जिनके माध्यम से 55 जिलों को जोड़ा गया है।
31 नए मेडिकल कॉलेजों में खुलेगी कार्डियक लैब
अब शेष 31 मेडिकल कॉलेजों में भी कार्डियक कैथ लैब स्थापित की जाएंगी। इसके अलावा गोरखपुर और मेरठ मेडिकल कॉलेज को कार्डियक केयर नेटवर्क से जोड़ते हुए 20 अन्य जिलों को भी इस सुविधा से जोड़ा जाएगा। कैथ लैब के माध्यम से एंजियोग्राफी, स्टेंट डालने, हृदय वाल्व सुधार और अनियमित धड़कन जैसे जटिल इलाज संभव हो सकेंगे।
हब एंड स्पोक मॉडल से मजबूत हुआ कार्डियक नेटवर्क
स्टेमी योजना के तहत हब एंड स्पोक मॉडल अपनाया गया है, जिसमें सीएचसी को सीधे कैथ लैब से जोड़ा गया है। 24 मार्च 2025 को केजीएमयू ने लखीमपुर, हरदोई और सीतापुर समेत चार जिलों को जोड़कर इस मॉडल की शुरुआत की थी। इसके बाद डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान से 10 जिलों को जोड़ा गया।
55 जिलों के 357 स्वास्थ्य केंद्र नेटवर्क से जुड़े
फिलहाल बनारस, कानपुर, सैफई, अलीगढ़, आगरा, प्रयागराज और झांसी समेत 10 मेडिकल कॉलेजों की कैथ लैब से 55 जिलों के 357 स्वास्थ्य केंद्र जोड़े जा चुके हैं। यहां कार्यरत डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ को चरणबद्ध तरीके से कार्डियक केयर का विशेष प्रशिक्षण दिया गया है।
सीएचसी से कैथ लैब तक त्वरित इलाज की व्यवस्था
इन जिलों में हार्ट अटैक के लक्षण दिखने पर मरीज की नजदीकी सीएचसी में ईसीजी की जाती है। रिपोर्ट मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों के व्हाट्सएप ग्रुप पर भेजी जाती है। यदि हार्ट अटैक की पुष्टि होती है तो प्रशिक्षित स्टाफ तुरंत खून पतला करने का इंजेक्शन देता है और जरूरत पड़ने पर मरीज को कैथ लैब में भर्ती कर एंजियोप्लास्टी की जाती है।
अब तक 82 हजार से ज्यादा ईसीजी, सैकड़ों जानें बचीं
18 जनवरी तक प्रदेश में लक्षणों के आधार पर 82,675 मरीजों की ईसीजी की गई, जिनमें 881 मरीजों को समय रहते इंजेक्शन देकर जान बचाई गई। डॉक्टरों के अनुसार, हार्ट अटैक में देरी होने पर हृदय की मांसपेशियां स्थायी रूप से क्षतिग्रस्त हो सकती हैं, जबकि गोल्डन आवर में इलाज मिलने से जीवन की गुणवत्ता भी बेहतर रहती है।
हर मरीज तक समय पर इलाज पहुंचाना लक्ष्य
अपर मुख्य सचिव अमित घोष ने बताया कि फिलहाल 10 कैथ लैब क्रियाशील हैं और इनकी संख्या तेजी से बढ़ाई जा रही है। मेरठ और गोरखपुर मेडिकल कॉलेजों से जुड़े 20 जिलों के स्टाफ को प्रशिक्षण दिया जा चुका है। सरकार का लक्ष्य है कि प्रदेश के हर हार्ट अटैक मरीज तक बिना देरी के उन्नत इलाज पहुंचे।