सुभाष चंद्र बोस: बचपन से क्रांतिकारी बनने तक का अद्भुत सफर

देशभक्ति, त्याग और आज़ादी के जुनून की कहानी

0 495

दिल्ली :  भारत के स्वतंत्रता संग्राम में सुभाष चंद्र बोस का नाम साहस, त्याग और क्रांति का प्रतीक है। उन्हें केवल एक नेता नहीं, बल्कि ऐसे क्रांतिकारी के रूप में याद किया जाता है, जिन्होंने आज़ादी के लिए अपने प्राण तक न्योछावर कर दिए। आइए जानते हैं नेताजी सुभाष चंद्र बोस के बचपन से लेकर क्रांतिकारी बनने तक के संघर्षपूर्ण सफर को।

बचपन और प्रारंभिक जीवन

सुभाष चंद्र बोस का जन्म 23 जनवरी 1897 को ओडिशा के कटक शहर में हुआ था। उनके पिता जानकीनाथ बोस एक प्रसिद्ध वकील थे, जबकि माता प्रभावती देवी धार्मिक और संस्कारवान महिला थीं। बचपन से ही सुभाष चंद्र बोस तेज बुद्धि और अनुशासित स्वभाव के थे।

शिक्षा और विचारधारा का विकास

सुभाष चंद्र बोस ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा कटक से प्राप्त की। बाद में उन्होंने कोलकाता के प्रेसिडेंसी कॉलेज और फिर स्कॉटिश चर्च कॉलेज से पढ़ाई की। उच्च शिक्षा के लिए वे इंग्लैंड गए और भारतीय सिविल सेवा (ICS) की कठिन परीक्षा पास की।
हालांकि, देश की गुलामी उन्हें स्वीकार नहीं थी, इसलिए उन्होंने प्रतिष्ठित नौकरी छोड़ दी और भारत लौट आए।

स्वतंत्रता संग्राम में प्रवेश

भारत लौटने के बाद सुभाष चंद्र बोस ने महात्मा गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस से जुड़कर आज़ादी की लड़ाई शुरू की। लेकिन वे केवल अहिंसा तक सीमित नहीं रहना चाहते थे। उनका मानना था कि अंग्रेजों को सत्ता से हटाने के लिए सशस्त्र संघर्ष आवश्यक है।

क्रांतिकारी विचार और आज़ाद हिंद फौज

ब्रिटिश सरकार के खिलाफ मुखर आवाज़ उठाने के कारण नेताजी को कई बार जेल में डाला गया। नजरबंदी से बचकर वे देश से बाहर निकले और जर्मनी व जापान की मदद से आजाद हिंद फौज का गठन किया।
तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आज़ादी दूंगा”—यह नारा आज भी भारतीयों के रगों में जोश भर देता है।

नेताजी का अमर योगदान

 

सुभाष चंद्र बोस ने भारतीयों को आत्मसम्मान और बलिदान का मार्ग दिखाया। उनका जीवन इस बात का प्रमाण है कि आज़ादी के लिए संघर्ष केवल शब्दों से नहीं, बल्कि कर्म और साहस से लड़ा जाता है।

नोट: अगर आपको यह खबर पसंद आई तो इसे शेयर करना न भूलें, देश-विदेश से जुड़ी ताजा अपडेट पाने के लिए कृपया Vnation के Facebook पेज को LikeTwitter पर Follow करना न भूलें...
Leave A Reply

Your email address will not be published.