उत्तर प्रदेश से कर्नाटक और बंगाल के लिए समर स्पेशल ट्रेनें, कई गाड़ियों का सुपरफास्ट दर्जा खत्म, यात्रियों को मिलेगी किराए में राहत
उत्तर प्रदेश से कर्नाटक और पश्चिम बंगाल के लिए गर्मियों की छुट्टियों में बढ़ती भीड़ को देखते हुए रेलवे प्रशासन ने नई समर स्पेशल ट्रेनों के संचालन की घोषणा की है। इस फैसले के साथ ही यूपी से गुजरने वाली कई प्रमुख ट्रेनों का सुपरफास्ट दर्जा समाप्त कर उन्हें मेल-एक्सप्रेस श्रेणी में डाल दिया गया है। इससे यात्रियों को किराए में राहत मिलेगी और लंबी दूरी की यात्रा थोड़ी आसान होगी।
हुबली और आसनसोल के लिए विशेष ट्रेनें
वाराणसी मंडल के जनसंपर्क अधिकारी के अनुसार, यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए गाजीपुर सिटी-हुबली और झांसी-आसनसोल के बीच विशेष गाड़ियाँ चलाई जाएंगी। गाजीपुर सिटी-हुबली स्पेशल ट्रेन 9 से 30 अप्रैल तक हर गुरुवार को सुबह 5.45 बजे गाजीपुर सिटी से रवाना होगी और वाराणसी होते हुए हुबली पहुंचेगी। झांसी-आसनसोल स्पेशल ट्रेन सप्ताह में दो दिन झांसी से चलेगी और वापसी में आसनसोल से दो दिन चलेगी। ये ट्रेनें बनारस और कैंट स्टेशनों पर भी ठहराव लेंगी।
बरेली से गुजरेंगी 12 समर स्पेशल ट्रेनें
रेलवे प्रशासन ने बरेली से गुजरने वाली करीब 12 स्पेशल ट्रेनों का संचालन तय किया है। सीनियर डीसीएम के अनुसार, अमृतसर-कोलकत्ता, योगनगरी ऋषिकेश-कोलकत्ता, नई दिल्ली-गोरखपुर, चंडीगढ़-पटना, भटिंडा-वाराणसी जैसी ट्रेनें अगले सप्ताह से जुलाई तक चलेंगी। प्रमुख ट्रेनें 05101-05102 गोरखपुर-नई दिल्ली, 05193-05194 छपरा-पठानकोट, 04512-04511 चंडीगढ़-पटना, 04520-04519 भटिंडा-वाराणसी, 04312-04311 योगनगरी ऋषिकेश-कोलकत्ता और 04624-04623 अमृतसर-कोलकत्ता शामिल हैं।
सुपरफास्ट दर्जा हटाया गया, किराए में मिली राहत
रेलवे ने वाराणसी से गुजरने वाली चार जोड़ी प्रमुख ट्रेनों का सुपरफास्ट दर्जा हटा दिया है। अब उपासना एक्सप्रेस, कुम्भ एक्सप्रेस, हिमगिरि एक्सप्रेस और विभूति एक्सप्रेस मेल-एक्सप्रेस श्रेणी में चलेंगी। इस बदलाव के बाद यात्रियों को अतिरिक्त सुपरफास्ट शुल्क नहीं देना होगा, जिससे टिकट की कीमत में 15 से 20 रुपये तक की बचत होगी।
गति कम होने के कारण लिया गया फैसला
रेलवे प्रशासन के मुताबिक, पूर्व में इन गाड़ियों की औसत गति 55 किलोमीटर प्रति घंटे से कम थी। प्रीमियम श्रेणी और सुपरफास्ट दर्जा होने के बावजूद ट्रेनें अक्सर देरी से चलती थीं और यात्रियों को समय पर गंतव्य तक नहीं पहुंचा पाती थीं। अब इन ट्रेनों को वास्तविक समय और गति को ध्यान में रखते हुए सामान्य एक्सप्रेस श्रेणी में डाल दिया गया है।