सोनम वांगचुक की रिहाई पर सुप्रीम कोर्ट के संकेत, खराब सेहत को देखते हुए केंद्र से मांगा जवाब

0 123

नई दिल्ली। जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की जेल से रिहाई को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने अहम टिप्पणी की है। शीर्ष अदालत ने केंद्र सरकार से सवाल किया है कि क्या वांगचुक की लगातार बिगड़ती सेहत को देखते हुए उनकी हिरासत पर पुनर्विचार करने की कोई संभावना है।

स्वास्थ्य रिपोर्ट पर सुप्रीम कोर्ट की चिंता
जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस पीबी वराले की पीठ ने सुनवाई के दौरान वांगचुक की मेडिकल रिपोर्ट पर गौर करते हुए कहा कि उनकी स्वास्थ्य स्थिति ठीक नहीं दिखाई दे रही है। पीठ ने केंद्र सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल केएम नटराज से इस मुद्दे पर सरकार से निर्देश लेकर अदालत को अवगत कराने को कहा।

पांच महीने पुराना है हिरासत आदेश
अदालत ने यह भी रेखांकित किया कि सोनम वांगचुक को हिरासत में लेने का आदेश करीब पांच महीने पहले, 26 सितंबर 2025 को पारित किया गया था। पीठ ने कहा कि इस मामले को केवल कानूनी दलीलों और प्रतिवादों तक सीमित न रखकर एक कोर्ट अधिकारी के रूप में मानवीय दृष्टिकोण से भी देखा जाना चाहिए।

पीठ की मौखिक टिप्पणी, ‘स्वास्थ्य ठीक नहीं’
सुनवाई के दौरान पीठ ने मौखिक रूप से कहा कि हिरासत में लिए गए व्यक्ति की स्वास्थ्य स्थिति को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। अदालत ने कहा कि पहले देखी गई रिपोर्ट यह संकेत देती है कि वांगचुक की सेहत अच्छी नहीं है, जो उम्र से जुड़ी वजहों या अन्य कारणों से हो सकती है। ऐसे में क्या सरकार इस मामले पर दोबारा विचार करने के लिए तैयार है।

केंद्र की ओर से विचार का आश्वासन
अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल केएम नटराज ने अदालत को बताया कि वह सुप्रीम कोर्ट के सुझाव को संबंधित अधिकारियों के सामने रखेंगे और इस पर सरकार का रुख स्पष्ट करेंगे।

हिंसा के आरोपों का भी किया गया जिक्र
सुनवाई के दौरान केंद्र की ओर से यह भी दलील दी गई कि सोनम वांगचुक पिछले वर्ष लेह में हुई भारी हिंसा के लिए जिम्मेदार थे। सरकार के मुताबिक, उस हिंसा में चार लोगों की मौत हुई थी और 161 लोग घायल हुए थे।

 

नोट: अगर आपको यह खबर पसंद आई तो इसे शेयर करना न भूलें, देश-विदेश से जुड़ी ताजा अपडेट पाने के लिए कृपया Vnation के Facebook पेज को LikeTwitter पर Follow करना न भूलें...
Leave A Reply

Your email address will not be published.