मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर ईरान का बड़ा बयान सामने आया है। ईरान के वरिष्ठ राजनयिक सईद खतीबज़ादेह ने साफ संकेत दिया है कि अगर अमेरिका हमले बंद करता है, तभी इस अहम समुद्री मार्ग पर सामान्य आवागमन बहाल किया जाएगा। उन्होंने कहा कि ईरान इस जलमार्ग को सुरक्षित रखने के लिए प्रतिबद्ध है, लेकिन मौजूदा हालात में इसकी स्थिति पूरी तरह हालात पर निर्भर करती है।
खतीबज़ादेह ने एक कार्यक्रम के दौरान कहा कि अमेरिका के साथ टकराव से पहले यह जलमार्ग सदियों से खुला रहा है। उन्होंने यह भी इशारा किया कि क्षेत्र में बढ़ती सैन्य गतिविधियां और हमले इस स्थिति के लिए जिम्मेदार हैं। उनके बयान को लेबनान में जारी संघर्ष और इजरायल की कार्रवाई से भी जोड़कर देखा जा रहा है।
सुरक्षित आवागमन पर ईरान की शर्तें
ईरानी पक्ष का कहना है कि वह अंतरराष्ट्रीय कानून और मानदंडों का सम्मान करता है, लेकिन स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पूरी तरह अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र नहीं है। ईरान के मुताबिक, इस मार्ग से गुजरने वाले जहाजों की सुरक्षा और आवाजाही ईरान और ओमान के आपसी सहयोग पर निर्भर करती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ईरान इस क्षेत्र को शांतिपूर्ण बनाए रखना चाहता है, लेकिन खाड़ी में युद्धपोतों की मौजूदगी और सैन्य इस्तेमाल को स्वीकार नहीं किया जाएगा।
क्या है स्ट्रेट ऑफ होर्मुज और क्यों है इतना अहम
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज ईरान, संयुक्त अरब अमीरात और ओमान के बीच स्थित एक संकरा लेकिन बेहद महत्वपूर्ण जलमार्ग है। यह फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी से जोड़ता है। अपने सबसे संकरे हिस्से में यह लगभग 33 किलोमीटर चौड़ा है, जिससे इसकी रणनीतिक अहमियत और बढ़ जाती है। वैश्विक समुद्री व्यापार, खासकर ऊर्जा आपूर्ति के लिए यह मार्ग बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।
दुनिया की ऊर्जा सप्लाई की लाइफलाइन
इस जलडमरूमध्य से दुनिया के करीब 20 प्रतिशत तेल और तरलीकृत प्राकृतिक गैस का परिवहन होता है। खाड़ी क्षेत्र के प्रमुख तेल उत्पादक देश—इराक, कुवैत, कतर, सऊदी अरब और यूएई—अपने निर्यात के लिए इसी रास्ते पर निर्भर हैं। अनुमानों के मुताबिक, 2025 तक रोजाना करीब 2 करोड़ बैरल तेल इस मार्ग से गुजर सकता है, जो वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए बेहद अहम है।
एशिया पर सबसे ज्यादा निर्भरता
ऊर्जा निर्यात के लिहाज से एशियाई देश इस जलमार्ग पर सबसे ज्यादा निर्भर हैं। 2022 के आंकड़ों के अनुसार, इस रास्ते से जाने वाले लगभग 82 प्रतिशत तेल और ईंधन एशिया की ओर जाता है। चीन इसमें सबसे बड़ा खरीदार माना जाता है, जो ईरान के तेल निर्यात का बड़ा हिस्सा खरीदता है।
बढ़ते तनाव से प्रभावित समुद्री यातायात
ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव का असर अब समुद्री व्यापार पर भी दिखने लगा है। क्षेत्र में सैन्य गतिविधियों के चलते जहाजों की आवाजाही में कमी आई है, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति और कीमतों पर असर पड़ने की आशंका बढ़ गई है।