मध्य प्रदेश में शिक्षक बनने का रास्ता होगा आसान, चयन परीक्षा पर विराम, पात्रता परीक्षा का स्कोर तय करेगा नियुक्ति

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भोपाल। मध्य प्रदेश में सरकारी स्कूलों में शिक्षक भर्ती की प्रक्रिया में बड़ा बदलाव आने वाला है। स्कूल शिक्षा विभाग ने प्रस्ताव तैयार किया है कि अब शिक्षक नियुक्ति केवल शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) के आधार पर होगी और चयन परीक्षा समाप्त कर दी जाएगी। इसका अर्थ है कि शिक्षक बनने के इच्छुक अभ्यर्थियों को केवल पात्रता परीक्षा पास करनी होगी और उसी स्कोर के आधार पर भर्ती की जाएगी।

दो परीक्षाओं की समाप्ति से अभ्यर्थियों को राहत
अब तक उच्च माध्यमिक, माध्यमिक और प्राथमिक शिक्षक भर्ती के लिए दो चरणों में परीक्षा आयोजित होती थी। पहले पात्रता परीक्षा होती थी और उसमें सफल अभ्यर्थियों को चयन परीक्षा में बैठने का अवसर मिलता था। चयन परीक्षा में सफलता मिलने के बाद ही नियुक्ति मिलती थी। इस प्रक्रिया के कारण अभ्यर्थियों को दो बार आवेदन और अलग तैयारी करनी पड़ती थी। नई व्यवस्था से अभ्यर्थियों को यह बोझ खत्म हो जाएगा।

शुल्क का भार भी घटेगा
वर्तमान प्रणाली में सामान्य वर्ग के अभ्यर्थियों को पात्रता परीक्षा के लिए 500 रुपये और चयन परीक्षा के लिए फिर 500 रुपये शुल्क देना पड़ता है। पात्रता परीक्षा में हर साल लगभग पांच से छह लाख अभ्यर्थी शामिल होते हैं। नई व्यवस्था लागू होने से बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों को आर्थिक और समय की राहत मिलेगी।

पात्रता परीक्षा का स्कोर आजीवन मान्य
ईएसबी के अधिकारियों के अनुसार प्रस्तावित व्यवस्था में पात्रता परीक्षा का स्कोर आजीवन वैध रहेगा। अभ्यर्थी अपने स्कोर में सुधार के लिए भविष्य में दोबारा परीक्षा दे सकते हैं। इसी स्कोर के आधार पर स्कूल शिक्षा विभाग शिक्षक भर्ती करेगा।

शिक्षकों की भारी कमी और नई भर्ती
प्रदेश के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी है। पिछले पांच वर्षों में करीब 35 हजार पदों पर भर्ती हुई, लेकिन अभी भी लगभग एक लाख पद खाली हैं। भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्ट के अनुसार 1,895 स्कूलों में शिक्षक नहीं हैं और 435 स्कूलों में कोई बच्चा भी नहीं है। 29,116 स्कूलों में केवल एक या दो शिक्षक तैनात हैं। इस साल स्कूल शिक्षा विभाग 30 हजार पदों पर भर्ती की प्रक्रिया शुरू करने जा रहा है।

पात्रता परीक्षा की अनिवार्यता और महत्व
शिक्षक पात्रता परीक्षा 2011 से अनिवार्य है। जिन शिक्षकों ने अब तक यह परीक्षा नहीं दी है, उन्हें आगामी भर्ती में शामिल होने के लिए इसे पास करना अनिवार्य होगा। यदि कोई अभ्यर्थी फेल होता है तो उसका निलंबन किया जा सकता है।

 

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