अजित पवार के असामयिक निधन के बाद महाराष्ट्र की रीत एनसीपी में गहन राजनीतिक उठापटक शुरू हो गई है। उनकी पत्नी सुनेत्रा पवार ने पार्टी की कमान संभाली, लेकिन इस बीच दो गुटों के बीच स्पष्ट मतभेद सामने आए हैं। विपक्ष ने इसे पार्टी में फूट का संकेत बताते हुए हमला बोला, जबकि बीजेपी ने इसे एनसीपी का आंतरिक मामला करार दिया।
क्या है पूरा मामला:
घटना 28 जनवरी से शुरू हुई, जब अजित पवार एक दुर्भाग्यपूर्ण विमान हादसे में निधन हो गए। इसके बाद पार्टी के भीतर मर्जर और नेतृत्व को लेकर हलचल तेज हो गई। प्रफुल्ल पटेल और सुनील तटकरे ने चुनाव आयोग को पत्र भेजकर कहा कि कार्यकारी अध्यक्ष के पास अध्यक्ष के समान अधिकार हैं। इसके बाद सुनेत्रा पवार को पार्टी का अध्यक्ष घोषित किया गया।
पार्टी में नाराजगी और विवाद:
अध्यक्ष बनने के बाद सुनेत्रा पवार ने पार्टी के संविधान में बदलाव की किसी मांग को स्वीकार नहीं किया और प्रफुल्ल पटेल को अतिरिक्त अधिकार देने से इनकार कर दिया। इसके बाद उन्होंने चुनाव आयोग को एक पत्र भेजकर खुद को राष्ट्रीय अध्यक्ष और ट्रेजरर का पद बताया, जिसमें प्रफुल्ल पटेल और सुनील तटकरे का पद स्पष्ट नहीं किया गया। इससे पार्टी में नाराजगी बढ़ी और अटकलें तेज हो गई कि क्या सुनेत्रा पवार वरिष्ठ नेताओं को पदों से हटाने वाली हैं।
विपक्ष का हमला और प्रतिक्रिया:
शिवसेना (उद्धव ठाकरे गुट) के सांसद संजय राउत ने कहा कि पार्टी में जल्द ही दो गुट बन सकते हैं और 25 से 30 विधायक बीजेपी में जा सकते हैं। वहीं एनसीपी (शरद पवार गुट) की विद्या चव्हाण ने कहा कि सुनेत्रा पवार नेतृत्व में सक्षम हैं, लेकिन पार्टी को सतर्क रहने की जरूरत है। शिवसेना (शिंदे गुट) की प्रवक्ता मनिषा कायंदे ने पलटवार किया और कहा कि संजय राउत पहले अपनी पार्टी की चिंता करें। बीजेपी ने इसे एनसीपी का आंतरिक मामला करार देते हुए कहा कि सुनेत्रा पवार नेतृत्व संभाल रही हैं।
सुनेत्रा-पटेल की बैठक से क्या निकलेगा:
अजित पवार के बेटे भारत पवार ने सफाई दी कि पार्टी पूरी तरह एकजुट है और सभी वरिष्ठ नेता मिलकर काम कर रहे हैं। एनसीपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता ने भी विपक्ष की अफवाहों को निराधार बताया। बीती रात सुनेत्रा पवार ने प्रफुल्ल पटेल से मुलाकात की, जिससे सुलह का रास्ता निकलता है या विवाद और बढ़ता है, यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा।