लखनऊ: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के तेजी से बढ़ते प्रभाव के बीच दुनिया भर में यह चर्चा तेज हो गई है कि भविष्य में कितनी नौकरियां मशीनों की वजह से खत्म हो सकती हैं। इसी विषय पर एआई कंपनी Anthropic ने हाल ही में एक विस्तृत रिसर्च की है। इस अध्ययन में यह समझने की कोशिश की गई कि आने वाले समय में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस किन-किन क्षेत्रों की नौकरियों को प्रभावित कर सकता है और कौन से पेशे फिलहाल इसके असर से काफी हद तक सुरक्षित हैं।
रिपोर्ट के अनुसार कई डिजिटल और डेटा आधारित नौकरियों में एआई का प्रभाव बढ़ सकता है, लेकिन कुछ ऐसे पेशे भी हैं जिनमें मशीनों की भूमिका सीमित रहने की संभावना है। खासतौर पर वे काम जिनमें शारीरिक श्रम, वास्तविक दुनिया में मौजूद रहकर काम करना और लोगों के साथ सीधा संपर्क जरूरी होता है, उन पर एआई का असर अभी कम माना जा रहा है।
रिसर्च में यह भी स्पष्ट किया गया है कि किसी भी नौकरी को पूरी तरह सुरक्षित या पूरी तरह खतरे में नहीं माना जा सकता। इसके बजाय यह देखा गया कि किसी पेशे के भीतर कौन से काम ऐसे हैं जिन्हें एआई आसानी से कर सकता है और कौन से कार्य अभी भी इंसानों द्वारा ही बेहतर तरीके से किए जा सकते हैं।
डिजिटल कामों में ज्यादा सक्षम है एआई
रिपोर्ट में बताया गया है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस उन कामों में ज्यादा प्रभावी है जो पूरी तरह डिजिटल प्लेटफॉर्म पर किए जाते हैं। जैसे डेटा का विश्लेषण करना, कोड लिखना, टेक्स्ट तैयार करना या कंप्यूटर आधारित प्रक्रियाओं को संभालना। ऐसे क्षेत्रों में एआई की क्षमता तेजी से बढ़ रही है।
इसके विपरीत वे काम जिनमें मशीनों की मरम्मत करना, उपकरणों को संभालना या लोगों को सीधे सेवा देना शामिल है, उनमें एआई की भूमिका अभी सीमित है। इन पेशों में वास्तविक परिस्थितियों को समझने और तुरंत निर्णय लेने की जरूरत होती है, जो अभी इंसानों की विशेषज्ञता पर ज्यादा निर्भर है।
इन 6 नौकरियों पर सबसे कम है एआई का खतरा
रिसर्च में छह ऐसे पेशों का जिक्र किया गया है जिन पर एआई का असर सबसे कम माना गया है। इनमें खाना बनाने वाले कुक, मोटरसाइकिल मैकेनिक, लाइफगार्ड, बारटेंडर, डिशवॉशर और ड्रेसिंग रूम अटेंडेंट शामिल हैं।
इन सभी कामों में व्यक्ति को मौके पर मौजूद रहकर काम करना पड़ता है। उदाहरण के तौर पर कुक को रसोई में अलग-अलग सामग्री और उपकरणों के साथ खाना तैयार करना होता है। वहीं मोटरसाइकिल मैकेनिक को मशीन की स्थिति समझकर उसे ठीक करना पड़ता है, जो केवल डिजिटल सिस्टम के जरिए संभव नहीं है।
इसी तरह लाइफगार्ड का काम भी बेहद जिम्मेदारी वाला होता है, जहां लोगों की सुरक्षा पर नजर रखना और किसी आपात स्थिति में तुरंत कार्रवाई करना जरूरी होता है। ऐसे कामों को पूरी तरह मशीनों या एआई के भरोसे छोड़ना फिलहाल संभव नहीं माना जा रहा।
किस आधार पर तय होता है एआई का असर
रिपोर्ट के मुताबिक किसी भी नौकरी पर एआई का प्रभाव इस बात पर निर्भर करता है कि उस काम का कितना हिस्सा डिजिटल माध्यम से किया जा सकता है। अगर किसी पेशे में अधिकतर काम कंप्यूटर और डिजिटल टूल्स से जुड़े हैं तो वहां एआई का असर ज्यादा हो सकता है।
इसके विपरीत जिन कामों में हाथों से काम करना, उपकरणों को संभालना या लोगों के साथ सीधे संपर्क में रहकर सेवा देना शामिल है, वहां एआई का प्रभाव अपेक्षाकृत कम रहने की संभावना है।
रिपोर्ट के अनुसार करीब 30 प्रतिशत नौकरियां ऐसी हैं जिनमें एआई के कारण खत्म होने का खतरा फिलहाल बहुत कम है, क्योंकि वे मुख्य रूप से शारीरिक श्रम और इंसानी संपर्क पर आधारित हैं।