नोएडा में दर्दनाक हादसा: दलदल में डूबी कार, 80 मिनट तक मदद के लिए चिल्लाता रहा इंजीनियर; पिता से बोला– मैं मरना नहीं चाहता

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ग्रेटर नोएडा। उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा से दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जहां सेक्टर-150 के टी-प्वाइंट के पास पानी से भरे गहरे गड्ढे में कार समेत गिरे सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की मौत हो गई। हादसे के वक्त युवराज करीब 80 मिनट तक मदद के लिए चिल्लाता रहा और अपने पिता को फोन कर आखिरी बार बोला, “मैं मरना नहीं चाहता।” घने कोहरे और अव्यवस्थाओं के बीच युवक की जान नहीं बचाई जा सकी।

दो बिल्डर कंपनियों पर एफआईआर, गैर इरादतन हत्या की धाराएं लगीं
नॉलेज पार्क कोतवाली पुलिस ने मृतक के पिता राजकुमार मेहता की शिकायत पर दो बिल्डर कंपनियों एमजेड विशटाउन प्लानर्स और लोटस ग्रीन के खिलाफ मामला दर्ज किया है। पुलिस ने बीएनएस की धारा 105 (गैर इरादतन हत्या), 106(1) (लापरवाही से मौत) और 125 (मानव जीवन को खतरे में डालना) के तहत एफआईआर दर्ज की है। घटना के बाद प्राधिकरण ने मौके पर मिट्टी का ढेर लगवाया, 10 फीट चौड़ी और सात फीट ऊंची लोहे की बैरिकेडिंग के साथ जर्सी बैरियर भी लगवाए हैं।

बेसमेंट में भरे पानी में डूबी कार, कोहरे ने बढ़ाई मुश्किलें
हादसा ग्रेटर नोएडा के नॉलेज पार्क थाना क्षेत्र में सेक्टर-150 के पास हुआ, जहां बेसमेंटनुमा गड्ढे में पानी भरा हुआ था। युवराज की तेज रफ्तार कार सीधे इसी गहरे पानी में जा गिरी। बताया गया कि हादसे के समय इलाके में घना कोहरा था, जिससे विजिबिलिटी लगभग शून्य हो गई थी।

पिता की आंखों के सामने बुझ गई बेटे की सांसें
युवराज के पिता ने बताया कि रात करीब 12 बजे बेटे का फोन आया, जिसमें उसने बताया कि उसकी कार नाले में गिर गई है। पिता 12:40 बजे तक मौके पर पहुंचे, लेकिन घने कोहरे के कारण कुछ दिखाई नहीं दे रहा था। इसके बाद युवराज ने मोबाइल की टॉर्च जलाकर यह साबित किया कि वह पानी में फंसा हुआ है।

‘सारे बचाव दल सिर्फ देखते रहे’
पिता का आरोप है कि सूचना मिलने पर पुलिस, फायर ब्रिगेड, एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें मौके पर पहुंचीं, लेकिन उनके पास पर्याप्त संसाधन नहीं थे। पानी ठंडा होने और भीतर सरिया होने का हवाला देकर कोई भी अंदर नहीं उतरा। रस्सी और क्रेन से प्रयास किए गए, लेकिन वे भी युवराज तक नहीं पहुंच पाए। इस दौरान युवक लगातार मदद की गुहार लगाता रहा और आखिरकार उनकी आंखों के सामने ही कार समेत डूब गया।

50 फुट गहरा गड्ढा, न बैरिकेडिंग न रिफ्लेक्टर
पिता ने तहरीर में बताया कि जिस प्लॉट में हादसा हुआ, वह एमजेड विशटाउन प्लानर्स का था और जमीन लोटस ग्रीन्स कंस्ट्रक्शन की थी। यहां करीब 50 फुट गहरा गड्ढा खोदा गया था, जिसमें हमेशा पानी भरा रहता है। न तो वहां कोई बैरिकेडिंग थी और न ही रिफ्लेक्टर लगाए गए थे। इससे पहले भी कोहरे में एक ट्रक यहां फंस चुका था, लेकिन कोई सबक नहीं लिया गया।

स्थानीय लोगों का विरोध, कैंडल मार्च निकाला
घटना के बाद सेक्टर-150 स्थित टाटा यूरेका पार्क सोसाइटी के निवासियों ने कैंडल मार्च निकालकर विरोध प्रदर्शन किया। लोगों ने बिल्डरों के साथ-साथ प्राधिकरण के जिम्मेदार अधिकारियों पर भी सख्त कार्रवाई की मांग की है।

पुलिस और प्रशासन का बयान
गौतम बुद्ध नगर के ज्वाइंट सीपी राजीव नारायण मिश्रा ने बताया कि घटना बेहद दुखद है। सूचना मिलते ही फायर विभाग, पुलिस और रेस्क्यू टीमों को लगाया गया। लैडर, सर्च लाइट और बोट की व्यवस्था की गई, बाद में एसडीआरएफ को जोड़कर रेस्क्यू किया गया। जीरो विजिबिलिटी के कारण काफी दिक्कतें आईं। पीड़ित परिवार की शिकायत पर मुकदमा दर्ज कर लिया गया है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

 

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