ट्रंप का बड़ा बयान: ईरान पर कड़ा रुख, होर्मुज स्ट्रेट खोलने की शर्त पर हटेगी नाकाबंदी

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नई दिल्ली: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा है कि अमेरिका होर्मुज स्ट्रेट से नाकाबंदी हटाने पर विचार कर सकता है, लेकिन इसके लिए ईरान को परमाणु हथियार न रखने की शर्त को स्वीकार करना होगा और होर्मुज को तुरंत पूरी तरह से खोलना होगा। ट्रंप ने यह भी संकेत दिया है कि वह ईरान को लेकर अंतिम फैसला जल्द लेने जा रहे हैं और इस पर सिचुएशन रूम में उच्चस्तरीय बैठकें चल रही हैं।

ईरान पर सख्त शर्तों के साथ अमेरिका की रणनीति
ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर पोस्ट करते हुए स्पष्ट किया कि ईरान को यह स्वीकार करना होगा कि वह कभी भी परमाणु हथियार विकसित नहीं करेगा। साथ ही उन्होंने मांग की कि होर्मुज स्ट्रेट को बिना किसी शुल्क और रोक-टोक के पूरी तरह से शिपिंग के लिए खोला जाए। उन्होंने कहा कि अगर समझौता होता है तो समुद्री मार्ग से जुड़े प्रतिबंध हटाए जा सकते हैं और क्षेत्र में फंसे जहाजों की सुरक्षित वापसी संभव हो सकेगी।

सिचुएशन रूम में जारी उच्चस्तरीय बैठकें
अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि वह इस पूरे मामले पर अंतिम निर्णय लेने की प्रक्रिया में हैं और इसके लिए लगातार सिचुएशन रूम में बैठकें की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि ईरान के सामने युद्ध समाप्त करने और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए आवश्यक शर्तों की सूची रखी गई है, जिन पर सहमति जरूरी है।

होर्मुज स्ट्रेट और सुरक्षा व्यवस्था पर फोकस
ट्रंप ने यह भी दावा किया कि समुद्री मार्गों में संभावित खतरों को देखते हुए पहले भी कुछ माइंस हटाने की कार्रवाई की गई है। उनके अनुसार शेष सुरक्षा जोखिमों को समाप्त करने के लिए ईरान को भी सहयोग करना होगा, ताकि वैश्विक शिपिंग सामान्य रूप से बहाल हो सके।

ईरान का जवाब और सख्त रुख
दूसरी ओर ईरान की ओर से भी कड़ा रुख सामने आया है। ईरान के संसद अध्यक्ष से जुड़े एक सोशल मीडिया अकाउंट से कहा गया कि बातचीत से नहीं बल्कि मजबूत रुख के जरिए ही रियायतें मिलती हैं। वहीं ईरान के विदेश मंत्री ने क्षेत्रीय हालात को लेकर ओमान के साथ बातचीत और एकजुटता की बात कही है।

मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच कूटनीतिक हलचल तेज
ईरान और अमेरिका के बीच 60 दिन के संभावित सीजफायर को लेकर चर्चा जारी है, हालांकि अभी तक कोई अंतिम समझौता नहीं हो सका है। ऐसे में ट्रंप का यह बयान मध्य-पूर्व में चल रहे तनाव और कूटनीतिक प्रयासों के बीच एक अहम संकेत माना जा रहा है।

 

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