ट्रंप की सख्त चेतावनी से ग्लोबल मार्केट में हड़कंप: एशियाई बाजार धड़ाम, कच्चा तेल 105 डॉलर के पार

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मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच वैश्विक बाजारों में घबराहट का माहौल गहरा गया है। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ताजा बयान ने निवेशकों की उम्मीदों को बड़ा झटका दिया है। ट्रंप ने संकेत दिए हैं कि अमेरिका अगले 2 से 3 हफ्तों में ईरान के खिलाफ कड़ा सैन्य कदम उठा सकता है, जिसके बाद बाजारों में तेज बिकवाली और कमोडिटी में उछाल देखने को मिला है।

एशियाई बाजारों में तेज गिरावट

ट्रंप के बयान का सबसे पहले असर एशियाई शेयर बाजारों पर देखने को मिला, जहां गुरुवार को प्रमुख इंडेक्स 1.4 फीसदी से ज्यादा टूट गए। इसके साथ ही अमेरिकी फ्यूचर्स में भी करीब 1 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। निवेशकों को उम्मीद थी कि क्षेत्र में तनाव जल्द कम होगा, लेकिन सख्त रुख ने इस भरोसे को कमजोर कर दिया।

कच्चे तेल की कीमतों में उछाल

भूराजनीतिक तनाव बढ़ने के साथ कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आया है। ब्रेंट क्रूड 4.2 फीसदी चढ़कर 105 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया। यह तेजी वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए चिंता का संकेत मानी जा रही है, क्योंकि इससे महंगाई पर दबाव बढ़ सकता है और कई देशों की अर्थव्यवस्था प्रभावित हो सकती है।

बॉन्ड मार्केट में हलचल

अनिश्चितता के माहौल में निवेशकों का रुख सुरक्षित विकल्पों की ओर बढ़ता दिखा। अमेरिकी 10 साल के ट्रेजरी बॉन्ड की यील्ड बढ़कर 4.36 फीसदी तक पहुंच गई। यह संकेत देता है कि बाजार में जोखिम से बचने की प्रवृत्ति बढ़ रही है, जिससे इक्विटी बाजारों पर अतिरिक्त दबाव बन रहा है।

ट्रंप के बयान से बढ़ा टकराव का खतरा

अपने संबोधन में ट्रंप ने कहा कि अमेरिका अपने रणनीतिक लक्ष्यों को हासिल करने के करीब है और जरूरत पड़ने पर कार्रवाई को और तेज किया जा सकता है। हालांकि उन्होंने बातचीत के रास्ते खुले होने की बात भी कही, लेकिन बाजार इस बयान से आश्वस्त नहीं दिखे और अस्थिरता बढ़ गई।

होर्मुज जलडमरूमध्य पर बढ़ी चिंता

इस पूरे घटनाक्रम के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य का मुद्दा भी केंद्र में आ गया है। यह मार्ग दुनिया की करीब 20 फीसदी कच्चे तेल की आपूर्ति का प्रमुख जरिया है। यहां किसी भी तरह की बाधा से वैश्विक सप्लाई चेन पर सीधा असर पड़ रहा है, जिससे कीमतों में उछाल तेज हो गया है।

आगे क्या होगा असर

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर मिडिल ईस्ट में तनाव जल्द कम नहीं हुआ, तो इसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर गहराता जाएगा। बढ़ती अनिश्चितता निवेशकों के भरोसे को कमजोर कर रही है और आने वाले दिनों में बाजार में उतार-चढ़ाव और तेज हो सकता है।

 

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